कृषि कानूनों को संवैधानिक और कानूनी तौर पर रोकने की पूरी कोशिश होगी : अमरिंदर सिंह

केंद्र के कानूनों को असंवैधानिक बताते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह ऐलान किया है.

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...

किसान क्यूँ कर रहे हैं साइलोज़ का बहिष्कार?

हरियाणा हो या पंजाब, किसान अडानी के Silos में अपनी फसल देने से इंकार कर रहे हैं, हालाँकि Adani Agro Logistics का...

हरियाणा में फसल ख़रीदी को लेकर किसानों के अनुभव

हरियाणा में 1 April 2021 से गेहूँ की ख़रीदी शुरू हो गयी है लेकिन किसान मंडी में बारदाने की कमी से लेकर...

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बड़ा ऐलान किया है। सोमवार को एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र के कानूनों को रोकने के लिए सभी संवैधानिक और कानूनी उपायों पर विचार किया जाएगा, किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ‘सभी को इस वक्त अपने राजनीतिक दलों को किनारे रख देने चाहिए. हम सभी को साथ आने और किसानों के लिए एकजुट होने की जरूरत है, ताकि केंद्र सरकार की आपदा से लड़ा जा सके. हमें इससे संवैधानिक तरीके से लड़ना होगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह सिर्फ पंजाब का मामला नहीं है. 70 फीसदी हिंदुस्तान किसान ही है. चाहे छत्तीसगढ़ हो, बिहार हो, मध्य प्रदेश हो यूपी हो…सभी जगह छोटे-छोटे किसान हैं.’ नए कानून के तहत कृषि उपज की खरीद को टैक्स फ्री रखने के फैसले पर पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के पास अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए वित्तीय साधन क्या बचे हैं? उन्होंने शिरोमणि अकाली दल पर भी निशाना साधा. कैप्टन अमरिंदर सिंह कहा कि जब अध्यादेश को केंद्रीय कैबिनेट में लाया गया तब वहां पर इसका विरोध क्यों नहीं किया?

इस बीच केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने सुप्रीम कोर्ट में इन कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है. उन्होंने अपनी याचिका में किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम-2020 और किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता अधिनियम-2020 को चुनौती दी है. उन्होंने इन दोनों कानूनों को संविधान के अनुच्छेद-14, अनुच्छेद-15 और अनुच्छेद-21 का उल्लंघन बताया है.

एक हफ्ते पहले संसद से पास हुए किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 रविवार (27 सितंबर) को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद अब कानून बन चुके हैं. हालांकि, किसान संगठन और विपक्षी दल इनका लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार इन कानूनों के साथ-साथ किसानों की फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने की गारंटी देने वाला कानून भी लाए, ताकि उन्हें फसलों की उचित कीमत मिलना सुनिश्चित हो सके.

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...