भारत बंद: किसानों के साथ सड़क पर उतरेंगे छात्र

'सरकार को लगता है कि संसद के अंदर उसके पास ताकत है, हम सरकार को दिखा देंगे कि सड़क की ताकत क्या होती है?'

किसान आंदोलन: पूरे हुए 4 महीने, क्या हुआ हासिल?

कृषि क़ानूनों का विरोध और MSP की गारंटी की माँग को लेकर देश भर में संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन के 120...

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...

कृषि आंदोलन: क्या है किसानों का मूड?

कृषि आंदोलन को 115 दिन होने को आए, इस बीच ये आंदोलन पंजाब-हरियाणा- उत्तर प्रदेश-राजस्थान-मध्य प्रदेश के बाद अब उन राज्यों में...

देश की सड़कें इस वक्त किसानों के गुस्से की गवाही दे रही हैं। कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है और सरकार से सीधी लड़ाई की हुंकार भर रहे हैं। 25 सितंबर को किसानों ने ‘भारत बंद’ का ऐलान किया है। इसमें देशभर के लगभग सभी किसान संगठन शामिल हो रहे हैं। राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई छात्र संगठनों ने भी ‘भारत बंद’ के समर्थन में सड़क पर उतरने का ऐलान किया है।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने बताया है कि एआईडीएसओ, एसएफआई, आइसा, एआईएसबी, पीएसयू और एआईएसएफ जैसे छात्र संगठन देशभर में भारत बंद में शामिल होंगे।

फाइल फोटो

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एन साईं बालाजी ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि, ‘सरकार ने जिस तरह नई शिक्षा नीति से छात्रों के अधिकार छीने हैं, उसी तरह किसान और मजदूरों के अधिकार छीनकर कॉरपोरेट्स को दे रही है। हम किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे और आगे भी उनके साथ हैं। मोदी सरकार की प्रो-कॉरपोरेट नीति के खिलाफ हम प्रो-डेमोक्रेसी और जनता के पक्ष में हैं। यह सिर्फ किसानों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश का मामला है। अंग्रेजी हुकुमत के बाद यह दूसरा कंपनी राज बनता जा रहा है हम इसे जनता के साथ मिलकर उखाड़ फेकेंगे।’

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष राजशेखर ने बातचीत में कहा कि, ‘सरकार के ये तीनों बिल किसानों और कृषि मजदूरों पर बड़ा हमला है। ये कानून पूंजीपति और कॉर्पोरेट्स को फायदा पहुचाएंगे और किसानों को बर्बाद कर देंगे।  हमारा छात्र संगठन किसानों के साथ है और पूरे देश की जनता इस आंदोलन के साथ है।’

राजशेखर ने बताया कि, ‘हमारा संगठन छात्रों और युवाओं के बीच इन कानूनों के खिलाफ कैंपेन भी कर रहा है। हमारे संगठन के ज्यादातर सदस्य किसान परिवारों से ही आते हैं। ये सभी देश के कई जिलों और गांवों में किसानों के साथ सड़कों पर उतरेंगे।’

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव मयूख विस्वास ने हमसे बातचीत में कहा कि, ‘ये कानून किसान, मजदूर और गरीब विरोधी हैं। मोदी राज में पहले शिक्षा पर हमला हुआ, जिससे गरीब छात्र शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो रहे हैं और इन कानूनों से गरीबों के बच्चे शिक्षा से और भी दूर हो जाएंगे।’

उन्होंने कहा कि, ‘हमारे संगठन के साथ देश भर में 40 लाख से ज्यादा छात्र जुड़े हैं। जो 25 सितंबर को किसानों के साथ सड़कों पर उतरेंगे। इससे पहले भी एसएफआई किसानों के साथ रहा है चाहे वह मंबई मार्च हो या दिल्ली में किसानों का आंदोलन। भारत बंद में शामिल होने के लिए हमने देश के लगभग सभी छात्र संगठनों से अपील की है। हमें समझना होगा कि यह सिर्फ किसानों पर नहीं, बल्कि गरीबों पर, छात्रों पर और पूरे देश पर हमला है।’

फाइल फोटो

भारत बंद से सरकार पर कितना दवाब बना पाएगा, इस सवाल के जवाब में मयूख ने कहा कि, ‘सरकार को लगता है कि संसद के अंदर उसके पास ताकत है, हम सरकार को दिखा देंगे कि सड़क की ताकत क्या होती है?’

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के महासचिव विक्की महेश्वरी ने कहा कि ‘हम किसानों के खिलाफ बन रहे कानूनों का विरोध करते हैं। कल जहां भी किसान प्रदर्शन करेंगे, वहां हमारे संगठन के सदस्य सड़क पर उतरेंगे। अगर किसानों ने आगे दिल्ली मार्च और संसद घेराव की रणनीति बनाई तो हम उसमें भी उनके साथ होंगे।’

विक्की महेश्वरी ने कहा कि, ‘यह किसान ही नहीं, हर इंसान की थाली पर हमला है। हम किसी भी हद तक इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन करेंगे। देश भर में एआईएसएफ के 19 लाख सदस्य किसी-न-किसी किसान के बेटा-बेटी हैं। प्रदर्शन स्थल पर हमारे साथी नुक्कड़ नाटकों और गीतों के जरिए भी किसानों का उत्साह बढ़ाएंगे।’ 

हालांकि, इससे पहले भी किसान आंदोलनों में छात्र संगठन शामिल हो चुके हैं। लेकिन इस बार भारत बंद में देश भर के किसान संगठन एक साथ सड़क पर उतर रहे हैं। लिहाजा देश भर के अलग-अलग हिस्सों में प्रभावशाली छात्र संगठनों की मौजूदगी 25 सितंबर के भारत बंद को बड़ा और ऐतिहासिक बना सकती है।

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...