सिरसा: मोर्चा, हिरासत और रिहाई के बाद फिर शुरू हुआ प्रदर्शन

बुधवार रात को 9 घंटे की हिरासत के बाद किसानों ने फिर से आंदोलन का ऐलान किया था।

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

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MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

हरियाणा के सिरसा में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग के साथ किसानों का प्रदर्शन गुरुवार को एक बार फिर से शुरू हो गया है। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान इन कानूनों पर दुष्यंत चौटाला के पक्ष से नाराज हैं। खट्टर सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद संभाल रहे दुष्यंत चौटाला ने इन कानूनों का समर्थन किया है। सिरसा में मंगलवार से किसान मोर्चा संभाले हुए हैं और दुष्यंत चौटाला से ‘कुर्सी या किसान?’ का सवाल पूछ रहे हैं।

हिंद किसान के खास कार्यक्रम ‘हिंद किसान की बात‘ में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि, ‘पुलिस ने हिरासत में लेकर किसानों की एकता को तोड़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ हरियाणा के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद किसानों को रिहा किया गया।’

योगेंद्र यादव ने कहा कि, ‘गुरुवार से दुष्यंत चौटाला के आवास के पास पक्का मोर्चा शुरू कर दिया है। जिस तरह पंजाब के किसानों के प्रदर्शन के बाद किसानों की पार्टी होने का दावा करने वाली शिरोमणी अकाली दल को एनडीए से बाहर होना पड़ा, केंद्रीय मंत्री पद से हरसिमरत कौर को इस्तीफा देना पड़ा। उसी तरह हरियाणा के किसान दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करेंगे, क्योंकि वह भी खुद को किसानों का नेता और चौधरी देवीलाल का राजनीतिक वंशज होने का दावा करते हैं।’

हिरासत के बाद भी नहीं हटे किसान

मंगलवार को हजारों की तादाद में किसान सिरसा के दशहरा मैदान में जुटे और वहां से दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग उठाई। इसके बाद किसानों ने दुष्यंत चौटाला के आवास की तरफ कूच किया। किसानों की रणनीति दुष्यंत चौटाला के आवास को घेरने की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें कुछ दूरी पहले रोक दिया। किसानों को हटाने के लिए उन पर वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया गया। लेकिन इन सबके बीच मंगलवार रात को किसान वहीं डटे रहे। बुधवार सुबह हरियाणा पुलिस ने योगेंद्र यादव समेत करीब 100 किसानों और किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया।

सिरसा में किसानों की हिरासत के बाद हरियाणा के कई इलाकों में किसानों ने चक्का जाम और विरोध प्रदर्शन किया। आखिरकार पुलिस को हिरासत के करीब 9 घंटे बाद बिना शर्त सभी किसान और किसान नेताओं को रिहा कर दिया। रिहाई के बाद किसानों ने प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया।

इसके बाद गुरुवार सुबह एक बार फिर से किसान दुष्यंत चौटाला के खिलाफ सड़क पर उतर गए। इस बीच मिली जानकारी के मुताबिक सिरसा प्रशासन ने किसानों को प्रदर्शन के लिए एक अलग जगह भी दी है।

यह भी पढ़ें- 9 घंटे बाद रिहा हुए किसान नेता, आंदोलन जारी रखने का ऐलान

देखिए- ‘हिंद किसान की बात’ कार्यक्रम में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के साथ खास बातचीत

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