केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान विधान सभा से विधेयक पास

दिनभर चली जोरदार बहस के बाद राजस्थान विधान सभा से केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को निष्प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अशोक गहलोत सरकार के तीन विधेयक पारित हुए।

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राजस्थान विधान सभा ने केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ तीन विधेयक पारित कर दिये हैं। विधान सभा सत्र के पांचवे दिन केंद्रीय कानूनों से राज्य पर पड़ने वाले असर को निष्प्रभावी बनाने वाले विधेयकों के पक्ष विपक्ष में जोरदार बहस हुई। केंद्रीय कानूनों के खिलाफ पंजाब और छत्तीसगढ़ के बाद अब राजस्थान विधेयक पारित करने वाला तीसरा कांग्रेस शासित राज्य बन गया है।  

विधेयकों पर बहस के दौरान राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि ‘केंद्र सरकार किसानों के खिलाफ कानून लेकर आई है। ये कानून किसी भी तरह से किसानों के हित में नहीं है और हम इसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि ये कानून किसानों को बड़ी कंपनियों का मजदूर बना देगी। जिससे किसानों को फसल के मनमाफिक पैसे नहीं मिलेंगे।’

कृषि मंत्री ने कहा कि इन कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी का जिक्र तक नहीं है, किसानों में आक्रोश है और वे लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसान के साथ जो पशुधन जुड़ा है उसका क्या होगा। किसान को मजबूर होकर चारा भी कंपनियों से खरीदने पर मजबूर होना पड़ेगा।

वहीं सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि ‘स्वामीनाथन आयोग मनमोहन सिंह की सरकार में बनाया गया रिपोर्ट भी उन्हीं की सरकार में आई लेकिन इस रिपोर्ट पर मनमोहन सिंह की सरकार ने कुछ नहीं किया। लेकिन केंद्र के कृषि कानूनों में यही प्रावधान किये गए हैं। पहले कानून को ठीक से पढ़िए, किसी ने भी इस कानूनों को ठीक से पढ़ने की कोशिश नहीं की।

गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि केंद्र के कानूनों में वहीं प्रावधान हैं जिन सुधारों की बात पहले की कांग्रेस सरकार कहती रहती थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोक सभा चुनाव के घोषणापत्र में यही वादे किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को सीधे मदद देने की कई योजनाएं बनाई हैं। गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि केंद्र की सत्ता में रहते हुए 54 सालों में उसने किसानों के लिए क्या क्या किया है।

सदन में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने चर्चा के दौरान कहा कि केंद्रीय कानून किसानों के पक्ष में है। इन कानूनों से किसानों को फसल बेचने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार जो बिल लाई है वह संविधान के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की समवर्ती सूची में लिखा है कि संसद के कानून विधान सभा के बनाए कानून से ऊपर होगा। राज्य सरकार को बिल लाने का अधिकार नहीं है।

वहीं राजस्थान के ऊर्जा मंत्री बुलाकी दास कल्ला ने कहा कि इन कानूनों के जरिए केंद्र सरकार ने गरीब, किसान और मजदूरों के खिलाफ काम किया है और अगले चुनाव में लोग इस सरकार को बर्खास्त कर देंगे। हालांकि, सदन में विधेयकों पर मतविभाजन के दौरान बीजेपी के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।

राजस्थान सरकार ने बीते हफ्ते शनिवार को सदन में तीन विधेयक पेश किए थे। राज्य सरकार के मुताबिक इन विधेयकों में राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। इनमें किसानों के उत्पीड़न पर कम से कम तीन साल की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है।

विधान सभा के जो तीन विधेयक पारित किए गए हैं। उनमें पहला- कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020, दूसरा- कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020 और तीसरा-आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020.

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