बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को झटका, शिरोमणि अकाली दल ने तोड़ा गठबंधन

शिरोमणि अकाली दल ने संसद से पारित हो चुके कृषि विधेयकों को किसानों और व्यापारियों के लिए हानिकारक बताते हुए यह कदम उठाया है।

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केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पारित विधेयकों पर क्या कहते हैं किसान नेता

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केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ अमरिंदर सरकार के विधेयक पारित

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संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों का आंदोलन अब सियासी असर दिखाने लगा है। कृषि विधेयकों को संसद में पेश करने के बाद एनडीए से बागी रुख अख्तियार करने वाली शिरोमणि अकाली दल ने अब गठबंधन छोड़ने का फैसला कर लिया है। शनिवार को पार्टी की कोर-कमेटी की बैठक के बाद पार्टी प्रमुख और फिरोजपुर से सांसद सुखबीर सिंह बादल ने गठबंधन तोड़ने का ऐलान किया।

अपने बयान में अकाली दल ने कहा है कि कृषि विधेयकों पर सरकार का फैसला न केवल किसानों के हितों के लिए, बल्कि खेत मजदूरों, व्यापारियों, दलितों के हितों के लिए बेहद हानिकारक है, जो खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं। पार्टी ने आगे कहा, ‘शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की आज रात की आपात मीटिंग में सर्वसम्मति से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से गठबंधन तोड़ने का फैसला किया गया, क्योंकि केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों की फसलों के सुनिश्चित मंडीकरण की रक्षा के लिए सांविधीय विधायी गारंटी देने से इंकार कर दिया और जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को छोड़कर पंजाबी और सिख मुददों के प्रति संवेदनहीनता जारी रखी।’

गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल पहले कृषि अध्यादेशों का समर्थन कर रही थी और किसानों को समझा रही थी कि इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। इतना ही नहीं, मानसून सत्र के पहले उसने केंद्र सरकार से किसानों की आशंका दूर होने तक कृषि विधेयकों को संसद में पेश न करने का अनुरोध किया था। लेकिन केंद्र सरकार ने सहयोगी दल होने के बावजूद शिरोमणि अकाली दल की बात को अहमियत नहीं दी। कृषि विधेयकों को लोक सभा में पेश करने से नाराज शिरोमणि अकाली दल ने न केवल सदन में कृषि विधेयकों का विरोध किया, बल्कि हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा भी दे दिया।

जानकार शिरोमणि अकाली दल के रुख में आए इस बदलाव के पीछे किसानों के बीच घटती साख को वजह बता रहे हैं। दरअसल, अकाली दल खुद को किसानों की पार्टी बताती रही है। लेकिन कृषि अध्यादेशों पर किसानों का जो आंदोलन सामने आया है, उसमें उसे छोड़कर दूसरे दलों को ज्यादा फायदा होता दिख रहा है। इससे पार्टी को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में नुकसान होने का खतरा सताने लगा है।

अकाली दल के एनडीए से अलग होने पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस विधायक रामकुमार विरका ने कहा, ‘आज जब अकाली दल को पता लग गया कि पंजाब के लोगों ने उनके लिए अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं तो उसने गठबंधन तोड़ दिया। न देश में बीजेपी का कोई आधार है और न पंजाब में अकाली दल का। जो किसानों से टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा।’

वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी अकाली दल पर निशाना साधा है। पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने ट्विटर पर लिखा, ‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। पंजाब को दशकों के लिए बीजेपी के हाथों में बेचने के बाद भ्रष्ट अकाली दल अब गठबंधन तोड़ने के एक घंटे के भीतर पवित्र होने के दावे कर रही है। नया नाटक।’

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