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पंजाब सरकार ने केंद्र के कृषि कानूनों को अपने राज्य में सीमित करने का फैसला लिया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार इसके लिए 19 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाएगी। बुधवार को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसकी जानकारी सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर दी गई। इसमें लिखा गया, ‘कृषि कानूनों के खतरनाक असर को प्रभावहीन करने के लिए राज्य के कानूनों में बदलाव करने वाला विधेयक लाने के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने 19 अक्टूबर को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है।’ इससे पहले पंजाब के कई किसान संगठनों ने अमरिंदर सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और केंद्र के कृषि कानूनों को रद्द करने वाला प्रस्ताव पारित करने की मांग की थी।

इससे पहले 28 अगस्त को समाप्त हुए विधानसभा सत्र के दौरान भी केंद्र के कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था। फिलहाल राज्य के दोनों ही प्रमुख केंद्र के कानूनों को किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला बता रहे हैं और इसका सड़क से लेकर संसद तक विरोध कर रहे हैं। इसमें सत्ताधारी दल कांग्रेस और विपक्षी दल शिरोमणि अकाली दल शामिल हैं। अकाली दल इन कानूनों का विरोध करते हुए अपने को बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार से अलग कर चुकी है।

कांग्रेस की तरफ से पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा में ट्रैक्टर यात्रा भी कर चुके हैं। कई इलाकों में किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि केंद्र में कांग्रेस सरकार बनते ही इन कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। वहीं, सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह भी लगातार यह बात दोहराते रहे हैं कि पंजाब के किसानों पर इन कानूनों का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा, सरकार इससे निपटने के लिए सभी संवैधानिक और कानूनी कदम उठाएगी।

इन सब के बीच पंजाब और हरियाणा के साथ देश भर में किसान इन कानूनों का जबरदस्त विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को किसानों को बातचीत के लिए दिल्ली भी बुलाया था, लेकिन यह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी। इस बीच किसान संगठनों ने तीन नवंबर को बड़े आंदोलन का ऐलान किया है।

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