केंद्र के कृषि विधेयकों को बेअसर करने के लिए राजस्थान मॉडल अपना सकता है पंजाब

राजस्थान सरकार एफसीआई, सीडब्लूसी और आरएसडब्लूसी के गोदामों को एपीएमसी एक्ट के तहत मंडी यार्ड घोषित कर चुकी है.

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संसद से पारित हो चुके कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के लगातार विरोध के चलते राज्य सरकारों पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। राज्य सरकारें कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020 के चलते मौजूदा मंडी व्यवस्था पर पड़ने वाले असर से निपटने के रास्ते तलाश रही हैं. दरअसल, यह विधेयक मौजूदा कृषि उपज मंडी समिति कानून (एपीएमसी एक्ट) को मंडी परिसर तक सीमित करता है और इसके बाहर कृषि उपज की टैक्स फ्री खरीद-फरोख्त की छूट देता है। इससे एमपीएमसी मंडियों में फसलों का कारोबार घटने और इससे राज्यों को मिलने वाले मंडी शुल्क में गिरावट आने का खतरा है।

‘हिंद किसान’ को सूत्रों से मिली जानकारी है कि पंजाब की अमरिंदर सिंह सरकार अब पूरे राज्य को ही प्रिंसिपल मंडी यार्ड बनाने या फिर राजस्थान मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। राजस्थान की गहलोत सरकार पिछले दिनों फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन और राजस्थान स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के गोदामों को एपीएमसी एक्ट के तहत खरीद केंद्र के रूप में नोटिफाई कर चुकी है। इससे इन जगहों पर होने वाली कृषि उपजों की खरीद-फरोख्त पर सरकार को मंडी शुल्क वसूलने का अधिकार मिल गया है।

हालांकि, पंजाब में ऐसा कोई फैसला करने से पहले सीएम अमरिंदर सिंह ने एडवोकेट जनरल अतुल नंदा से कानूनी सलाह मांगी है. प्रदेश सरकार को इसमें विपक्ष का भी साथ मिल रहा है. शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखवीर सिंह बादल पहले ही पूरे प्रदेश को मंडी यार्ड घोषित करने की सलाह दे चुके हैं।

संसद से पारित कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020 में परिभाषित बाजार में एपीएमसी एक्ट के तहत गठित मंडी समितियों की मंडियों को शामिल नहीं किया गया है। इससे किसान बगैर मंडी या आढ़ती के पास गए सीधे अपनी फसल बेच सकते हैं। किसानों को डर है कि केंद्र के इस कदम से मौजूदा मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और सरकार इसका बहाना लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर होने वाली फसलों की खरीद को बंद कर देगी। हालांकि, केंद्र सरकार लगातार समझा रही है कि एमएसपी पर खरीद व्यवस्था के जारी रहेगी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि केंद्र सरकार किसानों को एमएसपी देने के लिए प्रतिबद्ध है।

हालांकि, देश के किसान सरकार के इस दावे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं. वे इन कृषि अध्यादेश के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके खिलाफ 25 सितंबर को बुलाए गए भारत बंद के दौरान किसानों ने पंजाब से लेकर हरियाणा तक प्रदर्शन किया। इसका सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखा गया। माना जा रहा है कि आने वाले समय में किसानों का कृषि विधेयकों के खिलाफ आंदोलन तेज हो सकता है।

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