केंद्र सरकार को झटका, बातचीत के लिए नहीं आएंगे पंजाब के किसान

कृषि मंत्रालय के सचिव ने पंजाब के किसानों को बातचीत के लिए बुलाया था। ये बैठक 8 अक्टूबर को होने वाली थी लेकिन किसानों ने बैठक में न जाने का फैसला लिया है।

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कृषि कानूनों के खिलाफ रेल रोको आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों ने केंद्र सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है। केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने प्रदेश के किसानों को 8 अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया था। लेकिन पंजाब में 1 अक्टूबर से बेमियादी रेल रोको आंदोलन कर रहे 31 किसान संगठनों में से 25 किसान संगठनों ने बुधवार को चंडीगढ़ में बैठक की और इसमें फैसला किया कि वे बातचीत के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे।

इसमें शामिल किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन किसानों ने दिल्ली न जाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कृषि सचिव के पास फैसले लेने का अधिकार नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के लिए बुलावा भेजना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों में अब भी कोई पारदर्शिता नहीं है और न ही सरकार इस मसले पर गंभीर है, बातचीत के लिए न तो देश भर के किसानों को बुलाया गया और न ही हरियाणा के। सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि जब तक ये कानून वापस नहीं ले लिए जाते, हमारा आंदोलन न केवल जारी रहेगा, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा।

बुधवार की बैठक में किसान संगठनों ने पंजाब सरकार को भी चेतावनी दी है। किसानों ने पंजाब विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने और तीनों कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। किसानों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती तो किसान संगठन कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों का घेराव करेंगे।

इस बीच किसानों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने से भी इनकार किया है। इससे पहले केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने जा रही थी। लेकिन किसान संगठनों के विरोध के बाद उसने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। संगठन के प्रधान अजमेर सिंह लाखोवाल ने कहा कि वे पंजाब के किसानों के साथ खड़े हैं और कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे।

पंजाब के किसान संगठनों ने रेल रोको आंदोलन, बीजेपी नेताओं का विरोध और रिलायंस पेट्रॉल पंपों का बहिष्कार जारी रखने का भी फैसला लिया है। किसानों ने 15 अक्टूबर को बैठक करने और आगे की रणनीति तय करने का ऐलान किया है।

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