केंद्र सरकार को झटका, बातचीत के लिए नहीं आएंगे पंजाब के किसान

कृषि मंत्रालय के सचिव ने पंजाब के किसानों को बातचीत के लिए बुलाया था। ये बैठक 8 अक्टूबर को होने वाली थी लेकिन किसानों ने बैठक में न जाने का फैसला लिया है।

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

कृषि कानूनों के खिलाफ रेल रोको आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों ने केंद्र सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है। केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने प्रदेश के किसानों को 8 अक्टूबर को दोपहर 2.30 बजे बातचीत के लिए दिल्ली बुलाया था। लेकिन पंजाब में 1 अक्टूबर से बेमियादी रेल रोको आंदोलन कर रहे 31 किसान संगठनों में से 25 किसान संगठनों ने बुधवार को चंडीगढ़ में बैठक की और इसमें फैसला किया कि वे बातचीत के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे।

इसमें शामिल किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन किसानों ने दिल्ली न जाने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कृषि सचिव के पास फैसले लेने का अधिकार नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के लिए बुलावा भेजना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों में अब भी कोई पारदर्शिता नहीं है और न ही सरकार इस मसले पर गंभीर है, बातचीत के लिए न तो देश भर के किसानों को बुलाया गया और न ही हरियाणा के। सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि जब तक ये कानून वापस नहीं ले लिए जाते, हमारा आंदोलन न केवल जारी रहेगा, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा।

बुधवार की बैठक में किसान संगठनों ने पंजाब सरकार को भी चेतावनी दी है। किसानों ने पंजाब विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने और तीनों कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। किसानों ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती तो किसान संगठन कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों का घेराव करेंगे।

इस बीच किसानों ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने से भी इनकार किया है। इससे पहले केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने जा रही थी। लेकिन किसान संगठनों के विरोध के बाद उसने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। संगठन के प्रधान अजमेर सिंह लाखोवाल ने कहा कि वे पंजाब के किसानों के साथ खड़े हैं और कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे।

पंजाब के किसान संगठनों ने रेल रोको आंदोलन, बीजेपी नेताओं का विरोध और रिलायंस पेट्रॉल पंपों का बहिष्कार जारी रखने का भी फैसला लिया है। किसानों ने 15 अक्टूबर को बैठक करने और आगे की रणनीति तय करने का ऐलान किया है।

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