किसानों को देश में कहीं भी फसल बेचने की आजादी पहले से है : सरवन सिंह

किसानों ने कृषि कानूनों से देश में कहीं भी फसल बेचने की आजादी मिलने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावों पर सवाल उठाया है

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

पंजाब में कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दावों पर सवाल उठाया है। रेल रोको आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सरवन सिंह पंढेर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी ने जो बयान दिया उससे इन काले कानूनों की सच्चाई झलक गई। वह कह रहे हैं कि कंपनियां आपको खाद देगी बीज देंगी, मैं प्रधानमंत्री जी बताना चाहता हूं की पहले ही कंपनिय हमें दवाइयां भी बेंचती हैं, खाद भी बेंचती हैं। हमें सब मिल रहा है फिर कौन सी नई चीज देंगे। ये बात हमें आपकी सही नहीं लगी।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के अलावा उत्तराखंड में विकास योजनाओं के उद्घाटन के मौके पर कृषि कानूनों से किसानों को आजादी मिलने का दावा किया था। उनके इस बयान पर सरवन सिंह ने कहा, ‘आप किसानों को आजादी देने की बात करते हो तो एपीएमसी एक्ट आप खुद ही पढ़ लो मोदी जी! एपीएमसी एक्ट के तहत 1970 में ही हमें आजादी मिली हुई है किसान जहां चाहे वहां अपनी फसल बेच सकते हैं। किसानों पर कहीं भी फसल बेचने पर रोक नहीं है। हमारी (किसानों की) गाड़ियां या मशीनें कभी जब्त नहीं की गई।’ उन्होंने हरियाणा की खट्टर सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा, ‘आपकी खट्टर सरकार ने नए कानून बना रही है, वही किसानों की (फसलों से भरी) गाड़ियां रोक रहे हैं। आप अपनी फिक्र करें।’

पंजाब में रेल रोको आंदोलन कर रहे किसानों का धरना सातवें दिन भी जारी है। धरने पर बैठे किसान केंद्र सरकार पर किसानों के बजाए कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं। धरने पर बैठे किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करने की मांग कर रहे हैं। सरवन सिंह ने कहा, ‘स्वानीनाथन रिपोर्ट को लेकर आपने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके ये कहा कि स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू नहीं हो सकती। आप खेती से जुड़े काले कानून ले आए हो, स्वामीनाथन की बात करते हो, कंपनियों को फायदा पहुंचाने की बात करते हो, हम आपसे मांग करते हैं कि आप हम किसानों के साथ बात कर लो, हम हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं, जिससे पता चले की सच क्या है।’

अमृतसर और फिरोजपुर में धरने पर बैठे किसानों ने देश के सभी नागरिकों से कॉरपोरेट घरानों के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने की अपील शुरू की है। इसी कड़ी में बुधवार को किसानों ने जियो के सिम जलाकर अपना विरोध जताया। किसानों का रेल रोको आंदोलन 24 सितंबर से चल रहा है। इस आंदोलन 1 अक्टूबर से अब प्रदेश के 31 किसान संगठनों ने समर्थन देने का ऐलान किया है।

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