किसान संगठनों की मांग को मानने से पंजाब सरकार का इनकार

चंडीगढ़ में बैठक के बाद पंजाब के किसान संगठनों ने राज्य सरकार से विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित कराने की मांग की थी। किसान संगठनों ने इसके लिए सरकार को एक हफ्ते का वक्त दिया था।

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कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग को पंजाब सरकार ने मानने से इनकार कर दिया है। पंजाब सरकार के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से कहा गया है कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विशेष सत्र के लिए किसान यूनियनों की समय सीमा के जवाब में कहा है कि अल्टीमेटम रास्ता नहीं है, मुख्यमंत्री किसानों के हित में जो करना चाहते हैं, वह करने का संकल्प लेते हैं। इसके साथ ही सीएम अमरिंदर सिह ने रेल रोको आंदोलन कर रहे किसान संगठनों से माल गाड़ियों की आवाजाही की छूट देने पर विचार करने की भी अपील की है।

दरअसल, बुधवार को किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में बैठक करने के बाद मांग रखी थी कि वह विधान सभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करे। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा था, ‘किसान संगठन पंजाब सरकार को एक हफ्ते का वक्त दे रहे हैं। सरकार विधान सभा का सत्र बुलाए और कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पास करे।’

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार किसानों को बचाने के लिए हर मुमकिन कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि हम किसानों के साथ खड़े हैं और उन्हें भरोसा देते हैं कि उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

पंजाब में किसान संगठन 24 सितंबर से रेल रोको आंदोलन चला रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार की तरफ से कृषि सचिव ने इन किसान संगठनों को दिल्ली आकर बातचीत करने का न्यौता दिया था। लेकिन किसानों ने इसे ठुकरा दिया है।

यह भी पढे़ं- केंद्र सरकार को झटका, बातचीत के लिए नहीं आएंगे पंजाब के किसान

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