किसानों के विरोध के बीच तीनों कृषि विधेयक कानून बने, राष्ट्रपति ने मुहर लगाई

इन कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद के तहत देश भर में प्रदर्शन हुए हैं. इसके अलावा पंजाब में 24 सितंबर से रेल रोको आंदोलन जारी है.

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किसानों के भारी विरोध के बीच संसद से पारित हुए कृषि विधेयकों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मुहर लगा दी है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रविवार को राष्ट्रपति ने तीनों कृषि विधेयकों को मंजूरी दे दी. इसके साथ किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 अब कानून बन गए हैं.

विपक्ष ने बीते हफ्ते राज्य सभा से विधेयकों को पारित करने के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था. उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और इन विधेयकों को मंजूरी न देने की अपील की थी. इसके अलावा रविवार तक एनडीए में शामिल रहे अकाली दल ने भी राष्ट्रपति से इन विधेयकों को मंजूरी न देने की अपील की थी. इन विधेयकों के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुकी हरसिमरत कौर ने विवादित कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताया है. ट्विटर पर उन्होंने लिखा, ‘निश्चित तौर पर यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है, क्योंकि राष्ट्रपति ने राज्य सभा से असंवैधानिक तरीके से पारित इन किसान विरोधी विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने की 18 पार्टियों की अपील को मानने से इनकार कर दिया.’

खेती से जुडे तीनों कानूनों का देश भर में किसान विरोध कर रहे हैं. 25 सितंबर के भारत बंद के दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक विरोध प्रदर्शन हुए हैं. किसान इन कानूनों से खेती में कारपोरेट्स की दखल बढ़ने और खेती-किसानी को नुकसान होने की आशंका जता रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार के इन कथित कृषि सुधारों से कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) एक्ट के तहत चलने वाली मंडियां तबाह हो जाएंगी, फिर इसी का बहाना बनाकर सरकार फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद बंद कर देगी. दरअसल, एपीएमसी एक्ट के तहत चलने वाली मंडियों में सभी खरीद-फरोख्त पर टैक्स लगता है. लेकिन किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) एक्ट-2020 के तहत एपीएमसी मंडी परिसर को छोड़कर बाकी जगहों पर होने वाली कृषि उपजों की खरीद-बिक्री को टैक्स फ्री कर दिया गया है. इससे एमपीएमसी मंडी परिसर में काम करने वाले कारोबारी बाहर के कारोबारियों का सामना नहीं कर पाएंगे और अंत में उन्हें मंडी के भीतर अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा. इससे राज्य सरकार को मंडी टैक्स और किसानों को मंडी परिसर में मिलने वाली सुरक्षा का नुकसान उठाना पड़ेगा.

हालांकि, केंद्र सरकार एमएसपी पर फसलों की खरीद बंद होने की आशंका को लगातार खारिज कर रही है. रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन कृषि कानूनों और इसके जरिए कृषि क्षेत्र में हो रहे सुधारों का जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘साथियों, देश का कृषि क्षेत्र, हमारे किसान, हमारे गाँव, आत्मनिर्भर भारत का आधार हैं. ये मजबूत होंगे तो आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत होगी. बीते कुछ समय में इन क्षेत्रों ने खुद को अनेक बंदिशों से आजाद किया है, अनेक मिथकों को तोड़ने का प्रयास किया है.’

प्रधानमंत्री ने अपने कार्यक्रम में हरियाणा के एक किसान का उदाहरण दिया और बताया कि 2014 में राज्य में फल-सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करने का इस किसान को कैसे और कितना फायदा हुआ है. उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और लखनऊ से भी एमपीएमसी एक्ट में छूट के बाद किसानों को मिली सफलता के उदाहरण दिए. तमिलनाडु के एक किसान उत्पादक समूह का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आप सोचिये, कितने नौजवानों को उन्होंने रोजगार दिया. और मज़ा ये है कि बिचौलियों के ना होने के कारण किसान को भी लाभ हुआ और उपभोक्ता को भी. ऐसा ही एक लखनऊ का किसानों का समूह है. उन्होंने नाम रखा है ‘इरादा फार्मर प्रोडयूसर’. इन्होंने भी लॉकडाउन के दौरान किसानों के खेतों से सीधे फल और सब्जियां ली और सीधे जा करके लखनऊ के बाज़ारों में बेची-बिचौलियों से मुक्ति हो गई और मन चाहे उतने दाम उन्होंने प्राप्त किये.’ प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, ‘साथियों, आज की तारीख में खेती को हम जितना आधुनिक विकल्प देंगे, उतना ही वह आगे बढ़ेगी, उसमें नये-नये तौर-तरीके आयेंगे, नए इनोवेशंस जुड़ेंगे.’

लेकिन सरकार के इन तमाम दावों के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. रविवार को फिरोजपुर जंक्शन के रेलवे ट्रैक पर किसान मजदूर संघर्ष समिति की अगुवाई में सैकड़ों किसानों, मजदूरों और महिलाओं ने प्रदर्शन किया. यहां किसान 24 सितंबर से 29 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन चला रहे हैं. किसानों ने केंद्र सरकार के इशारे पर हरियाणा सरकार द्वारा लालारू और शंभू बैरियर पर नाकाबंदी को संविधान के अनुच्छेद-19 का घोर उल्लंघन बताया और इसे तत्काल हटाने की मांग की. किसान नेता सतनाम सिंह पन्नू ने 28 सितंबर को भगत सिंह की 113वीं जयंती पर रेलवे ट्रैक पर विशाल रैली करने का ऐलान किया है.

अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी का रेलवे ट्रैक पर धरना चौथे दिन जारी रहा. यहां भी संगठन की अपील पर किसानों के साथ महिलाएं और बेटियां भी केसरी चुनरी ओढ़कर अमृतसर रेलवे ट्रैक पर चल रहे आंदोलन में शामिल हुईं. किसानों का आरोप है कि इन विधेयकों (अब कानून) को अगर लागू कर दिया गया तो किसान निजी कंपनियों का गुलाम बन कर रह जायेगा, यही नहीं एमएसपी भी सरकार धीरे-धीरे ख़त्म कर देगी.

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