प्याज के दाम गिरे तो चर्चा नहीं, बढ़े तो इतना हंगामा क्यों होता है?

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प्याज की कीमतें एक बार फिर आसमान छू रही हैं। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने न केवल स्टॉक लिमिट लगाने और निर्यात रोकने के कदम उठाए हैं, बल्कि आयात नियमों में ढील देने का भी फैसला किया है। इन फैसलों का असर भी नजर आने लगा है। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में प्याज के थोक भाव में 10 रुपये किलो तक की कमी आयी है। लेकिन किसान सरकार पर किसानों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं।
महाराष्ट्र में किसान नेता विजय जावंधिया ने हिंद किसान से कहा, ‘जब किसानों का प्याज दो रुपये किलो बिकता है तब सरकार कोई कदम नहीं उठाती है, लेकिन शहरी उपभोक्ताओं को परेशानी होने और बिहार चुनाव में जनता को खुश करने के लिए सरकार ये तमाम कदम उठा रही है। इससे एक महीने बाद जब नया प्याज बाजार में आएगा तब किसानों को अपनी फसल की सही कीमत नहीं मिल पाएगी।’
अभी केंद्र सरकार ने प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए थोक कारोबारियों के लिए 25 टन, जबकि खुदरा व्यापारियों के लिए दो टन स्टॉक लिमिट तय की है। इसके अलावा आयात नियमों में भी ढील दी गई है। लेकिन किसान अब इससे नुकसान होने की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्टॉक लिमिट की वजह से व्यापारियों ने प्याज की खरीद बंद कर दी है। इससे किसानों को प्याज खराब होने और बाजार के दबाव में बेहद कम दाम पर बिकने के लिए मजबूर होने का डर सता रहा है।
महाराष्ट्र में नासिक के किसान शंकर दरेकर ने हिंद किसान से बातचीत में कहा, ‘व्यापारी किसानों का प्याज नहीं खरीद रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं रेड न पड़ जाए। सरकार बिहार चुनाव में लोगों को खुश करने के लिए ऐसा कदम उठा रही है।’ प्याज को आयात करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ‘अगले महीने से नई प्याज घरेलू बाजार में आने लगेगी और जब सरकार विदेशों से प्याज मंगा लेगी तो हमें तो फिर उसे बेहद कम दाम पर प्याजा बेचना पड़ेगा।’
शंकर दरेकर पांच एकड़ जमीन में प्याज की खेती करते है। उन्होंने बताया कि इस साल किसानों का लगभग 30 से 40 फीसदी प्याज बारिश के चलते खराब हो गया और जो बचा उसमें से आधा प्याज लागत से भी कम दाम पर बेचना पड़ा। इस बात को और साफ करते हुए शंकर ने कहा, ‘प्याज की एक एकड़ खेती में लगभग 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल की लागत आती है, लेकिन इसे हमने मई और जून में 600 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा, जबकि जुलाई में 1000 से 1100 रुपये क्विंटल में प्याज बिका। अब जब सिर्फ पांच से दस फीसदी प्याज ही बचा है सरकार चाहती है कि वो भी औने-पौने दाम पर ही बिक जाए।’
महंगाई रोकने के लिए प्याज को आयात करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए किसान नेता विजय जावंधिया ने कहा कि ‘सरकार विदेश से कम से कम 40 रुपये प्रति किलो की कीमत पर प्याज मंगाती है, अगर वह अपने यहां किसानों से 40 रुपये प्रति किलो पर प्याज खरीद करे और प्याज की किल्लत होने पर बेचे तो इससे किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को ही फायदा होगा।’
प्याज का बफर स्टॉक बनाने के लिए जिम्मेदार भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) के निदेशक अशोक ठाकुर ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘हमारी तैयारी पूरी है। नेफेड ने रबी सीजन में प्याज के बफर स्टॉक की पूरी तैयारी की है, हालांकि खरीफ सीजन में बारिश की वजह से प्याज की फसल खराब हो गई है। लेकिन सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाई है, साथ ही प्याज के आयात में ढील दी गई है। जिन राज्यों ने भी हमसे प्याज की मांग की है, उन्हें हम दे रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अगले सप्ताह तक प्याज की कीमतों में स्थिरता आ जाएगी।’
वहीं, महाराष्ट्र से वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पोहरे ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘जो खरीफ का प्याज था 70 से 80 फीसदी खराब हो गया। इस बार रबी की फसल की जो बुआई की थी वो प्याज भी खराब हो गई है। किसानों के पास महज 25 से 30 फीसदी प्याज ही बचा है, बाकी प्याज को किसान कम कीमत पर पहले ही बेच चुके हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि अगर देश में सोने की कीमत बढ़ती है तो सही है, लेकिन जब कभी कृषि उपज की कीमत बढ़ती है तो हंगामा हो जाता है, जबकि किसानों को बढ़ी हुई कीमत का कोई लाभ नहीं मिल पाता है।
केंद्र सरकार ने 14 सितंबर से प्याज के निर्यात पर रोक के साथ इसके आयात में ढील दी गई। हालांकि, यह नीति सवालों के घेरे में है। बीते साल भी प्याज की कीमतें बढ़ने पर केंद्र सरकार ने प्याज का बंपर आयात किया था। लेकिन यह प्याज भारत तब पहुंचा जब घरेलू फसल बाजार में आ चुकी थी। इसका सीधा खामियाजा किसानों को उठाना पड़ा। उन्हें अपनी प्याज को बेहद कम दाम पर प्याज बेचना पड़ा था। किसानों को इस साल भी ऐसा ही नुकसान होने का डर सता रहा है।

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