धान की सरकारी खरीद के लिए एनसीडीसी से छत्तीसगढ़ को मिले 9000 करोड़ रुपये

एनसीडीसी ने एमएसपी पर धान की सरकारी खरीद के लिए तीन राज्यों को कुल 19,444 करोड़ रुपये की राशि जारी की है.

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चालू खरीफ विपणन सीजन (2020-21) में धान की सरकारी खरीद करने वाली संस्थाओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने तीन राज्यों को 19444 करोड़ रुपये का कर्ज देने का फैसला किया है। धान की अगैती किस्मों की मंडी में आवक शुरू होने की वजह से केंद्र सरकार ने पंजाब और हरियाणा में इस बार समय से पहले यानी 26 सितंबर से धान की खरीद शुरू कर दी है। सामान्य रूप से खरीफ विपणन सीजन एक अक्तूबर से शुरू होता है। लेकिन इसे पंजाब और हरियाणा में एक सप्ताह पहले ही शुरू कर दिया गया है। एनसीडीसी द्वारा जारी सूचना के मुताबिक जिन राज्यों को खरीफ सीजन की सरकारी खरीद के लिए कर्ज उपलब्ध कराया गया है उनमें हरियाणा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। सबसे अधिक 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज छत्तीसगढ़ को दिया गया है। जबकि हरियाणा के लिए 5,444 करोड़ और तेलंगाना को 5,500 करोड़ रुपये की राशि दी गई है। राज्य सरकारें अपनी सहकारी संस्थाओं के जरिये सरकारी खरीद करती हैं उनके लिए यह वित्तीय संसाधन एनसीडीसी उपलब्ध कराता है। एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप नायक का कहना है कि एनसीडीसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की सरकारी खरीद के लिए दूसरे राज्यों को भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

एनसीडीसी से मिले इस सस्ते कर्ज से राज्यों और राज्य विपणन संघों को अपनी सहकारी समितियों के जरिए समय पर धान की खरीद करने में मदद मिलेगी. अपने बयान में एनसीडीसी ने कहा कि इस कदम से कोरोना महामारी के दौरान तीन राज्यों के किसानों को आर्थिक मदद मिलगी, जहां देश का लगभग 75 फीसदी धान पैदा होता है.

एनसीडीसी सहकारी क्षेत्र को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए साथ ही उनको कई दूसरे कामों के लिए भी मदद करता है। शुरुआती दौर में एनसीडीसी को कृषि उत्पादों के उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग, भंडारण, आयात और निर्यात के लिए प्लानिंग, प्रोत्साहन और वित्तीय कार्यक्रम चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन बाद में इसमें बदलाव करते हुए सहकारी समितियों की मदद करने का काम भी दे दिया गया। अभी एनसीडीसी प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की सहकारी समितियों की फाइनेंसिंग के लिए राज्यों को कर्ज और अनुदान मुहैया कराता है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर की और एक राज्य के बाहर काम करने वाले सहकारी संगठनों को भी फंड मुहैया कराता है।

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