किसानों के आंदोलन के बीच पंजाब और हरियाणा में धान की खरीद शुरू

केंद्र सरकार ने कहा है कि मंडियों में धान की अगैती किस्में आने लगी हैं, जिसे देखते हुए 1 अक्टूबर की जगह 26 सितंबर से खरीद शुरू की जा रही है।

पाम ऑयल मिशन को लेकर नॉर्थ-ईस्ट में उपजी आशंकाएं

“हमसे कोई सलाह-मशविरा नहीं लिया गया। नॉर्थ ईस्ट में पाम ऑयल मिशन ठीक नहीं है क्योंकि मेघालय में हम आदिवासियों का जीवन...

Palm Oil की खेती से क्या हैं नुक़सान?

National Mission on Edible oils- Oil Palm को सरकार ने 18 August 2021 को हरी झंडी दिखाई, खाने के तेल,Palm oil को...

MSP का खेल निराला, क्या है कुछ काला?

सरकार ने किसान आंदोलन के बीच रबी मार्केटिंग सीज़न 2022-23 के लिए फसलों की MSP का एलान किया है, सरकार फसलों के...

Karnal: किसानों ने सचिवालय पर डाला डेरा, सुनेगी सरकार?

मुज़फ़्फ़रनगर 5 September और फिर 7 September को हफ़्ते में दूसरी बड़ी किसान महापंचायत, किसानों ने अपनी माँग को पुरज़ोर तरीक़े से...

UP – Muzaffarnagar किसानों की हुंकार से होगा बदलाव?

5 September,2021, UP के मुज़फ़्फ़रनगर में किसानों की महापंचायत किन किन मायनो में अहम रही? ये किसानों का खुद का शक्ति परीक्षण...

संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के तीखे आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के धान की खरीद शुरू कर दी है। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में शनिवार यानी 26 सितंबर से ही धान की खरीद शुरू हो गई है, बाकि देश में धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होनी है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा में तय समय से पहले धान की फसलें मंडियों में आने लगी हैं, इसे देखते हुए तत्काल धान की खरीद शुरू करने का फैसला किया गया है, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिल सके। धान की खरीद में राज्यों की सभी खरीद एजेंसियों के साथ फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया भी शामिल हो रहा है। हरियाणा में इस बार धान की खरीद के लिए कुल 400 धान खरीद केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने कोविड महामारी को देखते हुए प्रदेश में 4000 धान खरीद केंद्र बनाए हैं। इसके लिए राइस मिलों को भी मंडी यार्ड घोषित किया गया है।

वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश में 27 सितंबर से धान की खरीद शुरू होने की जानकारी दी है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि राज्य में पीआर-126 किस्म के धान की खरीद 27 सितंबर से शुरू होगी. केंद्र सरकार ने इस साल धान के लिए 1,868 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी घोषित किया है। इस साल एमएसपी पर 495 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है, जो बीते खरीफ सीजन के 416 लाख टन के लक्ष्य से 20 फीसदी ज्यादा है।

हालांकि, सरकार भले ही मंडी में अगैती धान की आवक को जल्द खरीद शुरू करने की वजह बता रही हो, लेकिन इसे हरियाणा और पंजाब में कृषि विधेयकों के खिलाफ आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत बंद के दौरान इन दोनों राज्यों में किसानों का सबसे तीखा विरोध सामने आया है। इस मुद्दे पर हिंद किसान से हुई बातचीत में किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने कहा कि धान की जल्दी खरीद होना किसानों के लिए अच्छी बात है, लेकिन सरकार ने यह सोचकर जल्दी खरीद करने फैसला किया है कि इससे किसानों का ध्यान आंदोलन से बंटकर धान को बेचने में लग जाएगा और वे आंदोलनों में बहुत सक्रियता से शामिल नहीं होंगे। वहीं, धान खरीद के लिए जरूरी तैयारियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले 1 अक्टूबर से खरीद करने की बात कही थी, फिर 7 अक्टूबर से खरीद शुरू होने की बात आई, अब सरकार ने 26 सितंबर से खरीद शुरू करने का फैसला किया है, ऐसे में तैयारियों की असलियत तो तब सामने आएगी, जब किसान अपनी फसलें लेकर खरीद केंद्रों पर जाएंगे।

इस बीच संसद से पारित कृषि विधेयकों को लेकर किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार या तो इन कृषि विधेयकों को वापस ले या फिर इनके साथ एमएसपी पर फसलों को खरीदने की गारंटी देने वाला कानून बनाए। उनका कहना है कि सरकार ने इन विधेयकों में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं किया है। किसानों का यह भी आकलन है कि इन विधेयकों की वजह से एमपीएमसी एक्ट के तहत बनी मौजूदा मंडी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और इसके बाद सरकार इनके जरिए एमएसपी पर होने वाली खरीद को बंद कर देगी। हालांकि, सरकार लगातार किसानों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि फसलों की एमएसपी पर खरीद बंद नहीं की जाएगी। फिलहाल इस पर किसान भरोसा करते नजर नहीं आ रहे हैं।

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

पाम ऑयल मिशन को लेकर नॉर्थ-ईस्ट में उपजी आशंकाएं

“हमसे कोई सलाह-मशविरा नहीं लिया गया। नॉर्थ ईस्ट में पाम ऑयल मिशन ठीक नहीं है क्योंकि मेघालय में हम आदिवासियों का जीवन...

Palm Oil की खेती से क्या हैं नुक़सान?

National Mission on Edible oils- Oil Palm को सरकार ने 18 August 2021 को हरी झंडी दिखाई, खाने के तेल,Palm oil को...

MSP का खेल निराला, क्या है कुछ काला?

सरकार ने किसान आंदोलन के बीच रबी मार्केटिंग सीज़न 2022-23 के लिए फसलों की MSP का एलान किया है, सरकार फसलों के...