किसानों के आंदोलन के बीच पंजाब और हरियाणा में धान की खरीद शुरू

केंद्र सरकार ने कहा है कि मंडियों में धान की अगैती किस्में आने लगी हैं, जिसे देखते हुए 1 अक्टूबर की जगह 26 सितंबर से खरीद शुरू की जा रही है।

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

संसद से पारित कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के तीखे आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के धान की खरीद शुरू कर दी है। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में शनिवार यानी 26 सितंबर से ही धान की खरीद शुरू हो गई है, बाकि देश में धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होनी है।

केंद्र सरकार ने कहा है कि पंजाब और हरियाणा में तय समय से पहले धान की फसलें मंडियों में आने लगी हैं, इसे देखते हुए तत्काल धान की खरीद शुरू करने का फैसला किया गया है, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिल सके। धान की खरीद में राज्यों की सभी खरीद एजेंसियों के साथ फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया भी शामिल हो रहा है। हरियाणा में इस बार धान की खरीद के लिए कुल 400 धान खरीद केंद्र बनाए गए हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने कोविड महामारी को देखते हुए प्रदेश में 4000 धान खरीद केंद्र बनाए हैं। इसके लिए राइस मिलों को भी मंडी यार्ड घोषित किया गया है।

वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश में 27 सितंबर से धान की खरीद शुरू होने की जानकारी दी है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि राज्य में पीआर-126 किस्म के धान की खरीद 27 सितंबर से शुरू होगी. केंद्र सरकार ने इस साल धान के लिए 1,868 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी घोषित किया है। इस साल एमएसपी पर 495 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है, जो बीते खरीफ सीजन के 416 लाख टन के लक्ष्य से 20 फीसदी ज्यादा है।

हालांकि, सरकार भले ही मंडी में अगैती धान की आवक को जल्द खरीद शुरू करने की वजह बता रही हो, लेकिन इसे हरियाणा और पंजाब में कृषि विधेयकों के खिलाफ आंदोलन से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत बंद के दौरान इन दोनों राज्यों में किसानों का सबसे तीखा विरोध सामने आया है। इस मुद्दे पर हिंद किसान से हुई बातचीत में किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने कहा कि धान की जल्दी खरीद होना किसानों के लिए अच्छी बात है, लेकिन सरकार ने यह सोचकर जल्दी खरीद करने फैसला किया है कि इससे किसानों का ध्यान आंदोलन से बंटकर धान को बेचने में लग जाएगा और वे आंदोलनों में बहुत सक्रियता से शामिल नहीं होंगे। वहीं, धान खरीद के लिए जरूरी तैयारियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले 1 अक्टूबर से खरीद करने की बात कही थी, फिर 7 अक्टूबर से खरीद शुरू होने की बात आई, अब सरकार ने 26 सितंबर से खरीद शुरू करने का फैसला किया है, ऐसे में तैयारियों की असलियत तो तब सामने आएगी, जब किसान अपनी फसलें लेकर खरीद केंद्रों पर जाएंगे।

इस बीच संसद से पारित कृषि विधेयकों को लेकर किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार या तो इन कृषि विधेयकों को वापस ले या फिर इनके साथ एमएसपी पर फसलों को खरीदने की गारंटी देने वाला कानून बनाए। उनका कहना है कि सरकार ने इन विधेयकों में कहीं भी एमएसपी का जिक्र नहीं किया है। किसानों का यह भी आकलन है कि इन विधेयकों की वजह से एमपीएमसी एक्ट के तहत बनी मौजूदा मंडी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और इसके बाद सरकार इनके जरिए एमएसपी पर होने वाली खरीद को बंद कर देगी। हालांकि, सरकार लगातार किसानों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि फसलों की एमएसपी पर खरीद बंद नहीं की जाएगी। फिलहाल इस पर किसान भरोसा करते नजर नहीं आ रहे हैं।

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