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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और जनप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी आज पंचतत्व में विलीन हो गए। शुक्रवार शाम दिल्ली में यमुना किनारे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटी नमिता ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर उनके अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी भारी तादाद में आम से लेकर गणमान्य लोगों की भीड़ उमड़ी। देश-विदेश के तमाम नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत भाजपा के तमाम नेता उनकी अंतिम यात्रा में साथ-साथ पैदल चल रहे थे। अटल जी की आखिरी झलक पाने के लिए सड़क के दोनों ओर घंटों तक लोगों को जमावड़ा लगा रहा। इस बीच “अटल अमर रहे” के नारे गूंजते रहे।

कल रात अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को एम्स से कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास ले जाया गया था। आज सुबह उनके निवास से उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय लाया गया था। वहां से दोपहर बाद स्मृति स्थल के लिए उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। कल उनके निवास और आज सुबह भाजपा मुख्यालय पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए गणमान्य लोगों का तांता लगा रहा। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाध्यक्षों के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने उनके अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

आज दोपहर बाद वाजपेयी की अंतिम यात्रा में लोगों का हुजुम उनके साथ-साथ आगे बढ़ता गया। अपने प्रिय नेता की विदाई का गम लिए लोग उनके अंतिम दर्शनों के लिए बेताब थे। तिरंगे में लिपटे अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आम लोगों के बीच पैदल चल रहे थे।

इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एसपीजी और पुलिस के साथ-साथ सेना के वाहनों का काफिला मुश्तैद था। विपक्ष के कई नेताओं के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए स्मृति स्थल पहुंचे। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, केंद्र के मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और कई अंतराष्ट्रीय हस्तियां भी मौजूद रहीं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्मृति स्थल पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी।

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिहं चौहान, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्या वांगचुक, नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यालावी, बांग्लादेश के विदेश मंत्री सहन महमूद अली, भारत में ब्रिटेन के उच्चायुक्त डॉमिनिक एशक्विथ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी।

उनके अंतिम दर्शनों के लिए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, श्रीलंका के कार्यवाहक विदेश मंत्री लक्ष्मण किरिलिया और बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूज दिल्ली पहुंचे। वाजपेयी के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान सरकार की ओर से कार्यवाहक कानून और सूचना मंत्री अली मौजूद जफर रहे।

 

अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर वीडियो संदेश जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके लिए तो अटल जी का जाना पिता तुल्य संरक्षक का साया सिर से उठने जैसा है। उन्होंने संगठन और शासन दोनों का महत्व समझाया। दोनों में काम करने की शक्ति और सहारा दिया। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वे जीवन भर लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े रहे और यह प्रतिबद्धता उनके हर काम में नजर आती थी।

वाजपेयी के अंतिम दर्शन करने दिल्ली पहुंचे जावेद अख्तर ने कहा, ”कभी कभी ऐसा होता है कि ऐसे लोग पैदा होते हैं जिनसे विपरीत विचारधारा वाले लोग भी प्यार करें। अटल जी बहुत बड़े स्टेटमैन थे, सभी उनसे मोहब्बत करते थे। ऐसे दुर्लभ राजनेता थे, जिन्हें पार्टी लाइन से अलग होकर भी लोग सम्मान देते थे।”

अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वे 93 साल के थे। उनके निधन के बाद भारत सरकार ने सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है, इसके अलावा कई राज्य सरकारों ने भी राजकीय शोक का ऐलान किया है।

 

भारतीय राजनीति का अजातशत्रु

अटल बिहारी वाजपेयी पांच दशक से ज्यादा समय तक देश की राजनीति में सक्रिय रहे। 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और आर्य समाज से की थी। सन 1940 से 1944 के बीच वह संघ के प्रचारक रहे। भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी उनकी अहम भूमिका रही। वाजपेयी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं से भी जुड़े रहे।

उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1952 में लड़ा, हालांकि पहली जीत उन्हें 1957 में मिली। इससे पहले 1951 में उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर भारतीय जनसंघ की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। अपनी संगठन क्षमता, विचारधारा के प्रति  समर्पण और भाषण शैली के चलते जल्द ही वे जनसंघ का चेहरा बन गए। दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे। 1975 में आपातकाल के दौरान गिरफ्तार होने वाले नेताओं में अटल बिहारी वाजपेयी भी शामिल थे। सन 1977 में जब जनता सरकार बनी तो मोरारजी देसाई सरकार में वे विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले नेता थे।

1979 में मोरारजी देसाई के इस्तीफे और जनता परिवार में कलह के बाद 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने जनसंघ के साथियों लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की और इसके पहले अध्यक्ष बने। अस्सी के दशक में 2 सांसदों से शुरू हुआ अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा का सफर राम जन्मभूमि आंदोलन के साथ 1996 में केंद्र की सत्ता तक पहुंचा। 1996 में वे 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री रहे तो 1998 में उनकी सरकार सिर्फ 13 महीने चली। 1999 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए बहुमत हासिल किया और वाजपेयी ने पीएम के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया। साल 2004 में आम चुनाव में बीजेपी की हार के बाद उन्होंने गिरती सेहत के चलते राजनीति से संन्यास ले लिया था। उन्हें वर्ष 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न ने नवाजा गया।

वाजपेयी देश के उन प्रधानमंत्रियों में से एक थे जिन्हें हमेशा बड़े और बेबाक फैसलों के लिए जाना जाता था। परमाणु परीक्षण से लेकर पाकिस्तान से दोस्ती और कश्मीर समस्या के समाधान के प्रयास सरीखे उन्होंने लीक से हटकर कई फैसले लिए। कारगिल युद्ध से लेकर कंधार विमान अपहरण तक कई चुनौतियों का सामना किया। लेकिन हमेशा राजधर्म निभाने के संकल्प पर अटल रहे।

 

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