सब्जियों का न्यूनतम मूल्य तय करने वाला पहला राज्य बना केरल

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केरल में पिनाराई विजयन सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सब्जियों की खरीद करने का फैसला किया है। प्रदेश सरकार के इस फैसले को किसान नेता एक बेहतरीन पहल बता रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त संयोजक बीजू कृष्णन ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘देश में पहली बार ऐसी पहल हुई है जिसमें किसानों को उत्पादन लागत से 20 फीसदी ज्यादा बेस प्राइज तय किया गया है। यानी अगर इससे कम कीमत किसानों को मिलेगी तो सरकार इसमें हस्तक्षेप करेगी। आम तौर पर किसानों को लागत से कम कीमत पर सब्जी बेचनी पड़ती है। लेकिन सरकार के इस कदम से किसानों को सही कीमत मिलेगी। दूसरे राज्यों को भी इससे प्रेरणा लेकर इस तरह की पहल करनी चाहिए।‘

उन्होंने कहा कि ‘इस तरह की योजना को किसानों के लिए फायदेमंद बनाना राजनीतिक इच्छा शक्ति पर निर्भर है। इस योजना को लागू करने में हो सकता है शुरूआती दौर में कुछ दिक्कतें आएं लेकिन आगे चल कर यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी।‘

केरल, सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। योजना की शुरुआत में 16 सब्जियों का न्यूनतम मूल्य तय किया जाएगा। सब्जियों का यह न्यूनतम या आधार मूल्य, उनकी उत्पादन लागत से 20 फीसदी ज्यादा होगा। योजना की ऑनलाइन शुरुआत करते हुए, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन कहा कि ‘यह पहला मौका है जब केरल में उत्पादित 16 किस्मों की सब्जियों के लिए आधार कीमत तय की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य द्वारा यह पहली ऐसी पहल है जो किसानों को राहत और सहायता प्रदान करेगी साथ ही ये बेहद प्रभावी भी होगी।

सीएम ने फेसबुक पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा ‘ऐसे समय में जब देश भर के किसान कृषि क्षेत्र में नए सुधारों का विरोध कर रहे हैं, केरल सरकार सब्जियों की फसलों के लिए न्यूनतम कीमतों की घोषणा करके किसानों की मदद कर रही है। देश में पहली बार, किसी राज्य ने सब्जियों के लिए मूल्य निर्धारित किया है। सरकार ने किसानों को अधिक समर्थन देने के लिए यह कदम उठाया है।‘

योजना के तहत पहले चरण में ककड़ी, अनार, केला, मसूर, टमाटर, गोभी, गाजर, आलू, सेम, चुकंदर और लहसुन समेत 16 सब्जियों को शामिल किया गया है। हर फसल के उत्पादन की लागत से 20 फीसदी ज्यादा मूल्य तय किया जाएगा। अगर सब्जियों का बाजार मूल्य निर्धारित न्यूनतम मूल्य से कम है,  तो तय कीमत पर सब्जियों को किसानों से खरीदा जाएगा और उनके खाते में पैसा जमा किया जाएगा।

हालांकि, इससे पहले हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने सब्जी उगाने वाले किसानों को राहत देने के लिए 2018 में भावांतर भरपाई योजना शुरू की थी। इसके तहत सब्जियों के एक निश्चित मूल्य से कम दाम मिलने पर सरकार किसानों को बाकी पैसे की भरपाई करती है। शुरुआत में भावांतर भरपाई योजना में चार अहम सब्जियों आलू, प्याज, टमाटर और गोभी को शामिल किया गया था। हालांकि, प्रदेश के किसान इस योजना से खास लाभ न होने की शिकायतें करते रहे हैं।

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