चीन के इशारे पर हो रहा है कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन : जेपी दलाल

हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि कांग्रेस के इशारे पर काम करने वाले कुछ एक संगठनों ने तीन नवंबर को देश भर में चक्का जाम करने का ऐलान किया है।

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। किसान सड़कों पर डटे हैं और नई-ऩई जगहों पर मोर्चेबंदी का ऐलान कर रहे हैं। किसानों की मांगों के समर्थन में कांग्रेस पार्टी भी आंदोलन कर रही है। इस बीच हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने इन आंदोलनों के लिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। किसान संगठनों की ओर से 3 नवंबर को चक्का जाम करने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि यह सब कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने आगे कहा, ‘कांग्रेस के इशारे पर काम करने वाले कुछ एक किसान संगठन हैं, जिन्हें शांति बर्दाशत नहीं है। हाईवे जाम करने का मकसद यही होता है अव्यवस्था फैलेगी, गोलीबारी हो। मुझे लगता है कांग्रेस और चीन मिलकर देश में अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं, मोदी जी की लोकप्रियता से ये दोनों घबराए हुए हैं, लेकिन इनके एजेंडे को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।’

गुरुवार को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में 42 किसान संगठनों ने बैठक की थी। इसी बैठक में सभी किसान संगठनों ने तीन नवंबर को देशभर में चक्का जाम करने का ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि तीन तारीख को सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक छह घंटे के लिए देश भर में हाईवे को जाम किया जाएगा।

किसान आंदोलन का केंद्र बने पंजाब और हरियाणा के अलावा देश के कई और हिस्सों में किसान केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है। किसानों के अलावा राजनीतिक दल भी लगातार इसके खिलाफ आंदोलन और रैलियां कर रहे हैं। 4 से 6 अक्टूबर को कांग्रेस नेता और वायनाड से लोक सभा सांसद राहुल गांधी ने किसानों के समर्थन में पंजाब और हरियाणा में ट्रैक्टर रैली निकाली थी।

हरियाणा में धान की सरकारी खरीद में आ रही परेशानी पर प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि शुरूआत में जो दिक्कत आई थी, उसे ठीक कर लिया गया है, अब दोगुना किसानों को फसल लाने के लिए बुलाया जाएगा और भुगतान सीधे किसानों के खाते में जाएगी। उन्होंने अगले 30-40 दिनों में सरकारी ख़रीद पूरी कर लेने का भी दावा किया। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने दावा किया कि सरकार जो फैसले ले रही है, उससे किसानों को ही फायदा होगा।

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।