कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

महंगाई, खास तौर पर डीजल के दाम में बीते कुछ महीनों में हुए इजाफे के बाद एमएसपी में बढ़ोतरी को लेकर किसान इस पर सवाल उठा रहे हैं

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...

किसान क्यूँ कर रहे हैं साइलोज़ का बहिष्कार?

हरियाणा हो या पंजाब, किसान अडानी के Silos में अपनी फसल देने से इंकार कर रहे हैं, हालाँकि Adani Agro Logistics का...

हरियाणा में फसल ख़रीदी को लेकर किसानों के अनुभव

हरियाणा में 1 April 2021 से गेहूँ की ख़रीदी शुरू हो गयी है लेकिन किसान मंडी में बारदाने की कमी से लेकर...

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान विरोधी बता रहा है. किसानों ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. किसानों की नाराजगी और गुस्से के बीच केंद्र सरकार ने रबी सीजन की फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. सामान्य तौर पर ये ऐलान अक्टूबर में किया जाता है. केंद्र सरकार ने रबी सीजन की जिन 6 फसलों की एमएसपी बढ़ाई है, उसमें गेहूं, जौ, सरसों, मसूर, चना और कुसंभ शामिल है.

रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए गेहूं की एमएसपी में विपणन वर्ष 2020-21 के मुकाबले 50 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है. अब गेहूं की एमएसपी 1,925 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 1,975 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. वहीं, चने की एमएसपी 225 रुपए बढ़कर 5,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गई. जौ की कीमत में प्रति क्विंटल 75 रुपये का इजाफा किया गया है. अब इसकी एमएसपी 1,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.

सरकार ने दलहली फसलों में शामिल मसूर की एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की है. प्रति क्विंटल 300 रुपये के इजाफे के साथ अब इसकी कीमत 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई है. वहीं, सरसों की एमएसपी में 225 रुपए प्रति क्विंटल और कुसुम्भ की एमएसपी में 112 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है. इसके साथ सरसों की कीमत 4,650 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है, जबकि कुसुम्भ की कीमत 5,327 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फसलों की एमएसपी में इस बढ़ोतरी को सरकार का ऐतिहासिक फैसला बताया है. उन्होंने कहा, ‘बढ़ी हुई एमएसपी किसानों को सशक्त करेगी साथ ही उनकी आय दोगुनी करने में भी मदद करेगी.’ उन्होंने कहा, ‘किसानों के कल्याण के लिए कार्य करना हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है. अन्नदाताओं के हित में काम करने की हमारी प्राथमिकताओं के अनुरूप कैबिनेट ने एमएसपी बढ़ाने का एक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है. इससे करोड़ों किसान लाभान्वित होंगे.’ (())

वहीं, ट्विटर पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखा, ‘2013-14 से 2020-21 तक केंद्र की मोदी सरकार ने फसलों की एमएसपी में 40 से 65 फीसदी तक बढ़ोतरी की है.’

हालांकि, किसान नेता वक्त से पहले ही एमएसपी बढ़तरी को आपाधापी में उठाया गया कदम बता रहे हैं. किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने ट्विटर पर लिखा, ‘सरकार की रणनीति साफ़ है, MSP की गारंटी का कानून नहीं बनाएंगे, फिलहाल गुस्सा ठंडा करने के लिए MSP की घोषणा करेंगे, और 1-2 साल खरीद भी करेंगे, धीरे धीरे मंडी अपने आप ख़त्म हो जाएगी, जब मामला ठंडा हुआ तो धीरे धीरे MSP से पीछे हटेंगे, जिस दिन किसान फिर तितर बितर हुआ,उस दिन से खेल शुरू करेंगे.’

किसान नेता ने दावा किया कि 2012-13 में जहां फसलों की एमएसपी 9.8% बढ़ी थी, वहीं 2021-22 की फसलों की एमएसपी महज 2.6% बढ़ी है.

एक सवाल महंगाई के मुकाबले फसलों की एमएसपी को कम बढ़ाने का भी है. अगस्त, 2020 में खुदरा महंगाई दर 6.7 फीसदी रही, जबकि विपणन वर्ष 2021-22 की सबसे बड़ी फसल गेहूं की एमएसपी सिर्फ 2.6% बढ़ी है. बीते साल अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 3.28% थी, तब गेहूं की एमएसपी को 4.6 फीसदी बढ़ाया गया था.

बीते कुछ महीनों में न केवल महंगाई दर, बल्कि डीजल के दाम में भारी उछाल आया है. बीते साल अगस्त महीने में डीजल का दाम अलग-अलग राज्यों में 65 से 69 रुपये प्रति लीटर के करीब था, जो अब बढ़कर 71 रुपये प्रति लीटर के आसपास चल रही है.

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...