31 अक्टूबर तक कोल्ड सेटोरेज खाली करने का दबाव बढ़ा तो होगा आंदोलन – किसान

अगर प्रशासन 31 अक्टूबर तक कोल्ड स्टोरेज खाली करने का दबाव बनाता है तो आंदोलन होगा

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

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MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

उत्तर प्रदेश सरकार के 31 अक्टूबर तक कोल्ड स्टोरेज खाली करने के फैसले से आलू किसान खासे नाराज हैं। आगरा जिले में किसानों और कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने जिलाधिकारी आवास पर बैठक की और सरकार से कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की सीमा 30 नवंबर तक किए जाने की मांग की।

किसानों का कहना है कि फिलहाल आलू समेत रबी फसलों की बुआई का वक्त चल रहा है। हमें आलू के बीज की जरूरत पड़ती है, साथ ही हम लोग बुआई में लगे हैं ऐसे में अगर कोल्ड स्टोरेज से आलू निकाल दिए तो हम कहां ले जाएंगे। हमें मजबूरन कम कीमत पर व्यापारियों को आलू बेचना पड़ेगा।

भारतीय किसान संघ के प्रान्त अध्यक्ष मोहन सिंह चाहर ने कहा कि ‘अछनेरा मंडी में एक अक्टूबर से धान खरीद केंद्र बने हैं लेकिन एक दाना भी नहीं खरीदा गया। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य से बेहद कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हैं। बाजरा, दलहन की फसलों के लिए तो खरीद केंद्र खुले तक नहीं। उस पर सरकार का आलू के कोल्ड स्टोरेज खाली करने का फैसला किसानों के लिए बड़ी समस्या है।’ उन्होंने आलू भंडारण की अवधि 30 नवंबर तक किए जाने की मांग की।

किसान नेताओं ने कहा कि अगर प्रशासन किसानों पर 31 अक्टूबर तक आलू निकासी का दबाव बनाता है तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। हालांकि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं पर विचार कर जल्द ही यह समस्या दूर करने का भरोसा दिलाया।

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