हरियाणा: बरोदा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, किसानों ने जो कहा था वही हुआ

बरोदा सीट को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। उपचुनाव के नतीजों में किसानों का गुस्सा भी साफ दिख रहा है।

किसान आंदोलन: पूरे हुए 4 महीने, क्या हुआ हासिल?

कृषि क़ानूनों का विरोध और MSP की गारंटी की माँग को लेकर देश भर में संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन के 120...

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...

कृषि आंदोलन: क्या है किसानों का मूड?

कृषि आंदोलन को 115 दिन होने को आए, इस बीच ये आंदोलन पंजाब-हरियाणा- उत्तर प्रदेश-राजस्थान-मध्य प्रदेश के बाद अब उन राज्यों में...

हरियाणा की बरोदा विधान सभा उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी इंदु राज नरवाल ने बीजेपी प्रत्याशी पहलवान योगेश्वर दत्त को 10 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया है। हार के बाद योगेश्वर दत्त ने इंदु राज नरवाल को बधाई देते हुए कहा कि मैं लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। यह जनता का आदेश है मैं आगे भी मेहनत जारी रखूंगा।

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा ने इस जीत को किसानों और मजदूरों की जीत करार दिया और कहा कि बरोदा की जनता ने किसान- मजदूर विरोधी ताकतों को जवाब दिया है।

सोनीपत जिले में बरोदा विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस नेता और राज्‍य के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। उन्‍होंने यहां अपने सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा के साथ मिलकर आक्रामक प्रचार किया था।

क्या किसानों का गुस्सा पड़ा भारी?

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा में किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का गुस्सा भी इस नतीजे में दिख रहा है। किसान संगठनों ने एकजुट होकर गांव- गांव में जाकर कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरुक किया। इसके साथ ही मतदान से पहले बरोदा विधान सभा के 54 गांवों की महापंचायत में यह ऐलान किया गया था कि बीजेपी के खिलाफ मतदान किया जाएगा। इसके बाद भी कई मौकों पर किसान संगठनों ने बीजेपी के नेताओं का चुनाव प्रचार के दौरान विरोध भी किया। कई जगहों पर तो बीजेपी नेताओं को गांवों में घुसने तक नहीं दिया गया।

किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने ट्विटर पर कहा कि बीजेपी और जेजेपी की यह हार पीपली में किसानों पर लाठीचार्ज और किसानों के खिलाफ लाए गए कृषि कानूनों की वजह से हुई है। आपको बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पीपली में हरियाणा पुलिस ने किसानों पर लाठी चार्ज किया था। जिसके बाद पूरे हरियाणा और पंजाब में किसानों ने जबरदस्त विरोध के साथ लंबा आंदोलन शुरू कर दिया था।

बीजेपी उम्मीदवार योगेश्वर दत्त को बरोदा सीट से लगातार दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले 2019 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कृष्ण हुड्डा ने लगातार तीसरी जीत दर्ज करते हुए उन्हें हराया था। कृष्ण हुड्डा के निधन के बार बरोदा सीट पर उपचुनाव हुए हैं।

चुनाव आयोग के मुताबिक बरोदा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी इंदु राज नरवाल को 49.3 वोट प्रतिशत के साथ 60,636 वोट मिले जबकि बीजेपी प्रत्याशी योगेश्वर दत्त को 40.7 वोट प्रतिशत के साथ 50,070 वोट मिले हैं।

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...