हरियाणा: किसानों पर दर्ज मुकदमों का मामला, अब 29 अक्टूबर नहीं 10 दिसंबर को होगी महापंचायत

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

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MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

हरियाणा के नारायणगढ़ में किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के खिलाफ अब 29 अक्टूबर को अंबाला में होने वाली महापंचायत टाल दी गई है। भारतीय किसान यूनियन के नेताओं के मुताबिक हरियाणा के आईजी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया गया है।

हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने हिंद किसान से फोन पर बातचीत में कहा, ‘हमने किसानों पर मुकदमे वापस लेने के लिए सरकार को 29 अक्टूबर तक का वक्त दिया था। लेकिन आईजी महोदय ने हमसे बातचीत में और वक्त मांगा है। आईजी ने कहा है कि इतनी जल्दी जांच पूरी नहीं हो सकती, जांच के लिए हमें एक महीने का वक्त दीजिए। हालांकि इस बीच किसी किसानों को गिरफ्तार न करने की बात भी उन्होंने कही है।‘

किसान नेताओं के मुताबिक मृतक किसान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ जाने के बाद ही जांच का फैसला हो सकेगा इसीलिए 29 अक्टूबर को होने वाली महापंचायत को फिलहाल टाला जाता है और अब 10 दिसंबर को महापंचायत बुलाई जाएगी।

गुरनाम सिहं चढ़ूनी ने कहा कि उन्होंने हमसे एक महीने का वक्त मांगा और कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक कोई गिरफ्तारी नहीं करेंगे। इसीलिए हमने 10 दिसंबर तक का वक्त दिया है अगर तब तक किसानों पर मुकदमे वापस नहीं हुए तो 10 दिसंबर को महापंचायत बुलाई जाएगी।

क्या है मामला

हरियाणा के अंबाला में कृषि कानून के समर्थन में बीजेपी की रैली को कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने रोक दिया था। इस दौरान बीजेपी की रैली में शामिल एक किसान की मौत हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने कानूनों का विरोध कर रहे कुछ किसानों पर मुकदमे दर्ज किए थे। कानूनों का विरोध कर रहे किसान इन मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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