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कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों की नाराजगी और सरकार से सवाल बढ़ते जा रहे हैं। राजस्थान के हनुमानगढ़ी जिले में कृषि कानूनों की जानकारी किसानों से साझा करने पहुंचे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। सहजीपुरा गांव में पंचायत करने पहुंचे मंत्री शेखावत पर किसानों ने आरोप लगाया कि वह किसानों के सवालों के जवाब देने के बजाए विपक्षी दल की खामियां और राफेल पर बात कर रहे थे। किसानों ने गजेंद्र सिंह शेखावत पर सभी किसानों के बजाए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर कृषि कानूनों के बारे में समझाने की खानापूर्ती करने का भी आरोप लगाया। अपने सवालों का जवाब न मिलने से नाराज किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ और कृषि कानूनों को वापस लेने के नारे लगाए।

गंगानगर किसान समिति ने मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और किसानों के बीच हुई बातचीत का वीडियो अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया। वीडियो में देखा जा सकता हैं कैसे किसान मंत्री से सवाल कर रहे हैं। किसानों ने केंद्र सरकार पर कृषि कानून को समझाने के बजाए अपनी सरकार का गुणगान करने का आरोप लगाया।

ग्रामीण किसान मजदूर समिति के लीगल एडवाइजर हरविंदर सिंह गिल ने हिंद किसान को बताया कि ‘केंद्रीय मंत्री से किसानों ने पूछा कि कानूनों में एमएसपी का कहीं पर भी जिक्र नहीं है। इन कानूनों से मंडियां खत्म हो जाएगी, क्योंकि जब व्यापारियों को मंडी में टैक्स देना होगा तो वो मंडियों के बजाए बिना टैक्स के बाहर फसल खरीदेंगे, ऐसे में मंडियां बंद हो जाएंगी और अगर मंडियां ही बंद हो जाएंगी तो किसानों को एमसपी कहां से मिलेगी।’ उन्होंने कहा कि ‘इस सवाल पर मंत्री जी ने हमें जवाब देने के बजाए कहा कि आप किसानों के बजाए आढ़तियों की चिंता कर रहे हैं।’

हरविंदर गिल ने कहा कि ‘सरकार 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है लेकिन सिर्फ तीन फसलों गेहूं, धान और कपास की ही खरीद हो पाती है। जबकि बाजरा, मूंग जैसी फसल किसान कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। लेकिन किसानों के सवालों का जवाब सरकार के पास नहीं है सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है लेकिन लागत कितनी बढ़ रही है उस पर बात नहीं करती। स्वामीनाथन आयोग के मुताबिक किसानों की फसलों की सी-2 फॉर्मूले के हिसाब से लागत और एमएसपी तय नहीं की जाती।’

अखिल भारतीय किसान सभा के सदस्य शिवपत राम का कहना है कि ‘श्रीगंगानगर में चौपाल करने आए मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत कृषि कानूनों के बजाए दूसरे मुद्दों पर बात करते रहे।’ उन्होंने कहा कि कोविड के वक्त पर सरकार इन कानूनों के जरिए किसानों को आजादी देने का दावा कर रही है। लेकिन इनसे किसानों को नहीं कंपनियों को ही फायदा होगा। शिवपत राम ने हिंद किसान से बातचीत में बताया कि ‘श्रीगंगानगर में ही पेप्सीको कंपनी ने साल 2018 में किसानों से 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जौ खरीदने के लिए समझौता किया। इस बीच दो बार फसल खरीदी, लेकिन अप्रैल 2020 में जौ की गुणवत्ता खराब बताकर उसे खरीदने से ही इंकार कर दिया। मजबूरी में किसानों को 1000 से 1100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खुले बाजार में बेचना पड़ा। कई बार आंदोलन के बाद भी कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन कानूनों से तो कंपनियों को फायदा होगा जबकि किसानों को शोषण बढ़ेगा।’

कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान के श्रीगंगानगर में किसानों ने 17 अक्टूबर को बीजेपी सांसद निहाल चंद मेघवाल के आवास का घेराव करने और अपने सवालों का जवाब मांगने का ऐलान किया है।

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