नए कृषि कानून के तहत भुगतान में विवाद का मामला सामने आया

महाराष्ट्र के किसान जितेंद्र मोर्श ने जुलाई में नए कृषि कानून के तहत मध्य प्रदेश के व्यापारी को अपनी मक्का बेची थी, लेकिन वह अब व्यापारी से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषि से जुड़े तीन नये कानूनों को लेकर किसानों की आशंका सही साबित होने के मामले सामने आने लगे हैं। महाराष्ट्र के धुले जिले में नए कानून के तहत मक्का किसान के साथ भुगतान में विवाद होने का मामला सामने आया है। फसल बेचने के तीन दिन के भीतर भुगतान करने का कानूनी प्रावधान होने के बावजूद किसान करीब ढाई माह से अपने पैसे मिलने का इंतजार कर रहा है। देश में नये कृषि कानून अध्यादेश के जरिये पांच जून से ही लागू हो चुके हैं और अब इन अध्यादेशों का स्थान संसद में विधेयकों के पारित होने के बाद बने कानून ले चुके हैं। महाराष्ट्र के धुले जिले के शिरपुर तहसील के किसान जितेंद्र मोर्श ने 19 जुलाई को मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के व्यापारी सुभाषलाल वाणी को 270 क्विंटल मक्का बेचा था. लेकिन लगभग ढाई महीने का समय बीतने के बावजूद किसान को अब तक अपने 3,32,617 रुपये का भुगतान नहीं मिल पाया है. हिंद किसान के साथ बातचीत में जितेंद्र मोर्श ने बताया कि उन्होंने मध्य प्रदेश से आए व्यापारी को नए कानून के तहत 1,240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 270 क्विंटल मक्का बेचा था, नये कानूनों के मुताबिक मुझे तीन दिन के भीतर भुगतान मिल जाना चाहिए था लेकिन अभी तक 3,32,617 रुपये का भुगतान नहीं हुआ है और संबंधित व्यापारी ने जो फोन नंबर दिया था, वह अब स्विच ऑफ आ रहा है, मैं उससे संपर्क भी नहीं कर पा रहा हूं।

सरकार कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून-2020 के जरिए किसानों को कृषि उपज मंडी समिति (एमपीएमसी) की मंडियों में फसल बेचने से आजादी दिलाने और देश में कहीं भी अपनी फसलें बेचने की सुविधा देने के दावे कर रही है. इसके तहत कोई भी व्यक्ति महज स्थायी खाता संख्या (पैनकार्ड) के आधार पर किसानों से कही भी उनकी फसलें खरीद सकता है। इसमें किसान से फसल खरीदने पर उसी दिन या विशेष परिस्थितियों में अधिकतम तीन दिन के भीतर भुगतान करने का नियम है। अगर इसमें कहीं कोई विवाद होता है तो किसान को उपजिलाधिकारी के पास शिकायत करने का अधिकार है. इसके तहत उपजिलाधिकारी एक सुलह बोर्ड बनाता है और मामले का निपटारा करता है। अब इसी प्रावधान के तहत धुले के किसान जितेंद्र मोर्श ने मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में उपजिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई है। इसमें सुलह बोर्ड बनाने की मांग की गई है. जितेंद्र ने अपनी शिकायत के समर्थन में तौल की पर्ची, कच्चा बिल और क्रॉस चेक का नंबर दिया है। हिंद किसान के पास इस शिकायत और कच्चे बिल की कॉपी मौजूद है। इसमें दिए गए व्यापारी के नंबर पर जब हमने संपर्क किया गया तो वह अभी भी स्विच ऑफ बता रहा है।

किसान जितेंद्र ने अपनी शिकायत में दो सुलहकर्ताओं के नाम दिये हैं। इनमें से एक सुलहकर्ता रोहिदास से जब पूरे मामले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने केंद्र के नए कृषि कानून को किसानों के साथ फ्रॉड बताया। उन्होंने कहा कि बड़वानी और धुले दोनों बॉर्डर के जिले हैं, व्यापारी ने मध्य प्रदेश से 50 किलोमीटर दूर धुले जाकर किसान से फसल खरीदी और अब गायब हो गया।

वहीं, मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडी समिति से जुड़े एक कर्मचारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि मंडी में जब कोई किसान अपनी फसल बेचता है तो एपीएमसी एक्ट के तहत उसके भुगतान को पूरी सुरक्षा मिलती है, क्योंकि यहां केवल लाइसेंस लेने के बाद ही कोई व्यापारी खरीद-फरोख्त कर सकता है, लेकिन नए कानून के तहत व्यापारी अब किसानों से कहीं भी कच्चे बिल के साथ खरीदारी कर रहे हैं, इसमें गलत नीयत वाले व्यापारी उनके साथ धोखा भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धुले के मामले में व्यापारी ने नए कृषि कानून की धारा-4 की उपधारा-3 का उल्लंघन किया है, उसे किसान को एक पावती देनी चाहिए थी, जो उसने नहीं दी है, शायद भुगतान भी नहीं किया गया हो। मंडी कर्मचारी ने आगे बताया कि नए कृषि कानून की धारा-4 का उल्लंघन करने पर धारा-11 के तहत एसडीएम दोषी व्यापारी के ऊपर 5,000 रुपये से लेकर 5,00,000 रुपये तक जुर्माना लगा सकते हैं।

इस मामले में जब मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल राज से पूछा गया तो उन्होंने नए कानून के तहत किसानों के साथ धोखाधड़ी के मामले बढ़ने की आशंका जताई। उन्होंने कहा, ‘नए कानून के तहत व्यापारी का मंडी में कोई पंजीकरण नहीं होता है, ऐसे में अगर कोई व्यापारी किसी किसान के खेत पर फसल खरीदे और बाद में भुगतान का आश्वासन देकर चंपत हो जाए तो किसान क्या करेगा?’ नए कृषि कानून के तहत विवाद निपटाने की व्यवस्था पर राहुल राज ने कहा कि जो अधिकारी नामांतरण का काम तक समय पर नहीं निपटा पाते, वे किसानों की ऐसी शिकायतों को कैसे समय पर निपटाएंगे, प्रशासन उद्योगपतियों और कंपनियों से नहीं लड़ पाएगा, किसानों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ेगा, शिकायतों के निपटाने के नाम पर रिश्वतखोरी बढ़ेगी। किसान नेता राहुल राज ने कहा कि हम लोग गांव-गांव जाकर किसानों को इसी खतरे के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

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