5 नवंबर को थम जाएंगे देशभर के हाइवे, कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे किसान

आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं किसान संगठन.

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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर किसान संगठन 5 नवंबर को देशभर में चक्का जाम करेंगे। पंजाब, हरियाणा से लेकर छत्तीसगढ़ तक सभी किसान संगठनों ने दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक नेशनल हाइवे जाम करने का फैसला किया है।

हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने फेसबुक पर वीडियो शेयर कर किसानों के साथ-साथ आम जनता से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्र विरोधी कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन से घबराकर सभी तरह के हथकंडे अपना रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि करनाल जिले में रायपुर रोडान के जीटी रोड पर लगने वाले जाम पर कोर्ट से स्टे लिया गया है, लेकिन हम लोग वहीं पर जाम लगाएंगे। अंजाम जो भी हो हम लोग आंदोलन करेंगे।

किसान संगठन आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। किसान नेता रमनदीप सिंह मान ने भी ट्वीट जरिए केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चक्का जाम करने का ऐलान किया।

पंजाब और हरियाणा में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का किसान लगातार विरोध कर रहे है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश कुमार बैंस ने हिंद किसान से बातचीत में कहा, ‘केंद्र के काले कानूनों के खिलाफ 5 नवंबर के आंदोलन की पूरी तैयार कर ली गई है। कल हरियाणा में सभी नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम किया जाएगा। अगर सरकार किसानों की मांगे नहीं मानती तो किसान 26 नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे’ हालांकि उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान गांव जाने वाले रास्तों, सेना और एंबुलेंस को नहीं रोका जाएगा।

हरियाणा और पंजाब ही नहीं छत्तीसगढ़ में भी 30 से ज्यादा किसान संगठन देशव्यापी चक्का जाम आंदोलन में शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पराते ने कहा कि ‘प्रदेश के 30 से ज्यादा किसान संगठन सड़कों पर उतरेंगे और प्रदेश के सभी राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर चक्का जाम किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि ‘जगह-जगह इन कानूनों की प्रतियां और सरकार के पुतले भी जलाए जाएंगे। साथ ही “कॉर्पोरेट भगाओ- खेती-किसानी बचाओ-देश बचाओ” का नारा भी बुलंद किया जाएगा।’

किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार इस देश की कृषि और खाद्यान्न को बाजार और कार्पोरेटों के हवाले करना चाहती है इसलिए, मोदी सरकार ने ये तीन कृषि विरोधी कानून बनाये हैं।

राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘हमारा संगठन राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में चक्का जाम करेंगा। आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र की सरकार तानाशाह की तरह सोचती है।

उन्होंने ये भी कहा कि ‘सरकार अगर इस आंदोलन के बाद भी अगर कोई कदम नहीं उठाती तो, सभी किसान संगठनों के साथ बैठक की जाएगी और उसके बादे ही आगे रणनीति तय की जाएगी।’

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा समेत देश के दूसरे राज्यों में भी किसान अपना विरोध जता रहे हैं। किसान केंद्र सरकार से कृषि कानून वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद का कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

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