कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की नई रणनीति अपनाएंगे किसान

बीजेपी नेताओं के बहिष्कार के बाद किसान अब नए आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

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कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन पर भले ही केंद्र सरकार ने चुप्पी साध रखी हो लेकिन किसान संगठन अब दिल्ली कूच करने की तैयारी करने लगे है। हरियाणा और पंजाब में दो अक्टूबर से किसानों ने जहां बीजेपी नेताओं का बहिष्कार शुरू कर दिया है। वहीं अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईएकेएससीसी) हरियाणा ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। इसके तहत सिरसा में 6 अक्टूबर को किसान उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से इस्तीफा देने की मांग करेंगे। कृषि कानूनों के अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद न होने से किसान नाराज हैं। उन्होंने 14 अक्टूबर को एमएसपी अधिकार दिवस मनाने का ऐलान किया है। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने सभी किसानों से इसमें शामिल होने की अपील की है।


किसान संगठन 14 अक्टूबर को होने वाले आंदोलन में ही 26-27 नवंबर को “दिल्ली चलो” के लिए अपील कर सकते हैं। एआईकेएससीसी के कार्यकारिणी सदस्य योगेंद्र यादव ने कहा कि इन तीनों कानूनों को उनके सही नाम से पुकारना चाहिए- जमाखोरी खोलो कानून, बंधक किसान कानून और मंडी तोड़ो-एमएसपी छोड़ो कानून। उन्होंने आगे कहा, ‘आए दिन प्रधानमंत्री के वक्तव्य से स्पष्ट है कि सरकार बौखला गई है।’ उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की तरफ से इन कानूनों की वकालत किए जाने पर ताज्जुब जताते हुए योगेंद्र यादव ने कहा, ‘उन्हें किसान या कुर्सी में से किसी एक का चुनाव करना होगा। जब देश में एक भी किसान संगठन या किसान नेता इन कानूनों के साथ नहीं खड़ा है, ऐसे में श्रद्धेय चौधरी देवी लाल की विरासत पर दावा करने वाले दुष्यंत महाभारत के शिखंडी की भूमिका क्यों निभा रहे हैं?’

अखिल भारतीय किसान सभा के वरिष्ठ नेता इंद्रजीत ने कहा, ‘इन तीनों कानूनों को एक साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। यह तीनों कानून किसानों के लिए नहीं बल्कि व्यापारियों और कंपनियों के हित के लिए लाए गए हैं। अगर सरकार इन कानूनों को नहीं छोड़ेगी तो देश की जनता इन्हें कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर देगी।‘ हरियाणा सरकार की ओर से किसानों का एक-एक दाना अनाज एमएसपी पर खरीदने के दावे पर उन्होंने कहा, ‘आज भी बाजरे की खरीद पर अधिकतम 8 क्विंटल प्रति एकड़ की शर्त लगा रखी है और पोर्टल बंद होने के कारण किसान रजिस्ट्रेशन नहीं करा पा रहे है।’

इस बीच पंजाब और हरियाणा में किसानों ने बीजेपी नेताओं का विरोध तेज कर दिया है। हरियाणा में तो किसानों ने अपने गांव के बाहर बाकायदा बैनर लगा दिए हैं।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में लगा बैनर

शुक्रवार को अमृतसर में रेल रोको आंदोलन कर रहे किसानों से मिलने पहुंचे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को भी किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा।हरियाणा के सिरसा में बीजेपी सांसद सुनीता दुग्गल को किसानों ने ओढ़ा गांव जाने से रोक दिया था। इससे पहले गुरुवार को यमुनानगर में बीजेपी सांसद नायब सिंह सैनी और पूर्व राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज को किसानों ने काले झंडे दिखाए।

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