‘किसान चाहिए या कुर्सी’, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला से किसानों का सवाल

कृषि कानूनों पर एनडीए से अकाली दल के बाहर होने से बाद से ही हरियाणा के डिप्टी सीएम पर लगातार दवाब बन रहा है। दुष्यंत चौटाला कानूनों की किसानों के हित में बता रहे हैं तो विपक्षी दलों से लेकर किसान लगातार दुष्यंत चौटाला से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

देशभर में चल रहे किसान आंदोलन के बीच हरियाणा के सिरसा में आज किसानों ने उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के इस्तीफे की मांग की। सिरसा के दशहरा मैदान में जुटे हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से आए हजारों किसानों ने दुष्यंत चौटाला के साथ-साथ ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह चौटाला के आवास का घेराव करने का भी ऐलान किया। प्रदर्शन में पहुंचे स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, ‘हरियाणा के कोने-कोने से किसान चौधरी देवीलाल की कर्मभूमि सिरसा पहुंच रहे हैं। किसान सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं कि किसान चाहिए या कुर्सी?’

किसान आंदोलन के बीच हरियाणा की खट्टर सरकार में शामिल जननायक जनता पार्टी यानी जेजेपी और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। किसानों के प्रदर्शन के ऐलान के साथ ही सिरसा में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बीच मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक दुष्यंत चौटाला बीती रात ही चंडीगढ़ रवाना हो गए हैं। इस पर दुष्यंत को घेरते हुए योगेंद्र यादव ने कहा, ‘जब दुष्यंत चौटाला को समझ आ गया कि वह किसानों के सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो चंडीगढ़ भाग गए। घर के बाहर पुलिस और बैरियर खड़े कर दिए। जिस नेता को पुलिस और बेरियर का सहारा लेना पड़े वह जनता का नेता नहीं होता। आज किसान जाएगा मोर्चा लगाएगा। हम चौटाला हाउस की तरफ जाएंगे और दुष्यंत चौटाला के घर के बाहर डेरा डालेंगे।’

सिरसा के दशहरा मैदान में किसानों के प्रदर्शन की तस्वीरें

किसान संगठन लगातार जेजेपी से खट्टर सरकार से समर्थन वापस लेने की मांग कर रहे हैं। जबकि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला खेती से जुड़े कानूनों को किसानों के हित में होने के दावे कर चुके हैं। किसान संगठन इस बात से बेहद नाराज हैं। योगेंद्र यादव ने कहा, ‘चौधरी दुष्यंत चौटाला और रणजीत सिंह आज बीजेपी की गोदी में बैठ कर सत्ता का सुख भोग रहे हैं। देश का एक भी किसान संगठन और नेता इन कानूनों के समर्थन में नहीं है तब चौधरी देवीलाल के राजनीतिक विरासत का वारिस होने का दावा करने वाले दुष्यंत चौटाला और रणजीत सिंह इन कानूनों के हक में इनकी ढाल बनकर क्यों खड़े हैं? आपको किसान प्यारा है तो त्यागपत्र देकर किसानों के साथ खड़े हों। इस आंदोलन में आकर कानूनों का विरोध करो। अगर आपको सत्ता प्यारी है तो किसान अपना हिसाब कर लेंगे।’

कृषि कानूनों पर बगावती तेवर दिखाते हुए शिरोमणी अकाली दल के एनडीए से अलग होने के साथ ही जेजेपी पर भी दवाब बढ़ गया है। इस बीच कांग्रेस ने दुष्यंत चौटाला से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। वहीं, जेजेपी में कृषि कानूनों के खिलाफ अंदरूनी कलह भी सामने आ रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी के कई विधायक इन कानूनों के खिलाफ हैं और इस पर दुष्यंत चौटाला के रुख से खासे नाराज हैं।

90 सदस्यों वाली हरियाणा विधान सभा में 10 विधायकों वाली जेजेपी और बीजेपी (40 विधायक) का गठबंधन सत्ता में है। इससे पहले कृषि कानूनों का बचाव और उन्हें किसानों के हित में बताते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी पर कोई आंच आई तो वह इस्तीफा दे देंगे।

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