यूपी सरकार के फैसले से नाराज किसान, 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोरेज में आलू रखे जाने की मांग

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

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MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

प्याज़ की तरह आलू की कीमतों में भी लगातार उछाल जारी है। खुदरा बाजार में आलू की कीमत 40 से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में आलू की कीमतों पर काबू पाने के लिए उत्तर प्रदेश के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने सभी जिलों में 30 अक्टूबर तक कोल्ड स्टोरेज को खाली करने का आदेश दिया है।

सरकार के इस फैसले से किसान खासे नाराज हैं। किसानों ने इस फैसले के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी है। किसानों का कहना है कि फिलहाल आलू की बुआई का काम चल रहा है और बुआई के लिए बीज की जरूरत पड़ती है इसलिए आलू कोल्ड स्टोरेज में रखे हैं। ऐसे में कोल्ड स्टोरेज से निकले आलूओं को हम कहां लेकर जाएंगे। किसान इसे सरकार की तानाशाही बता रहे हैं। आगरा जिले के शेखपुरा गांव के रहने वाले किसान लाखन सिंह त्यागी ने हिंद किसान से बातचीत में कहा, ‘हमारे यहां फिलहाल आलू की बुआई चल रही है 15 नवंबर तक हम इस काम में व्यस्त हैं। जब पांच साल से किसान आलू फेंक रहे थे आत्महत्या कर रहे थे, तब सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी। अब किसानों को दो पैसे बचे तो सरकार किसानों को धमकी दे रही है’

दस एकड़ जमीन पर आलू की खेती करने वाले लाखन सिंह ने बताया की 50 किलो आलू के एक पैकेट को कोल्ड स्टोरेज में रखने का किराया 10 से 15 रुपये सालाना है। उन्होंने कहा कि ‘बुआई के वक्त बीज की कमी न पड़े इसके लिए भी आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाता है। अगर हमारे आलू कोल्ड स्टोरेज से बाहर निकाल दिए तो हम अपने खेतों में बुआई करेंगे या फिर आलू बेचेंगे। इस तरह तो हमें व्यापारियों को मनमाने दाम पर आलू बेचने पड़ेंगे। सरकार ने अगर अपना फैसला वापस नहीं लिया तो हम सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।’

किसान सरकार आलू को 30नवंबर कोल्ड स्टोरेज में रखे जाने की मांग कर रहे हैं। आगरा के किसान नेता सोमवीर ने हिंद किसान से कहा, ‘ये सरकार का तानाशाही फैसला है। किसान खेत तैयार कर रहे हैं और सरकार ने किसानों की दिक्कतें बढ़ा दी है। हमारी मांग है कि सरकार किसानों को एक महीने तक और कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की इजाजत दे।’

कॉल्ड स्टोरेज मालिकों का कहना है कि हर साल 31 अक्टूबर तक का कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने का अनुबंध होता है, लेकिन हर साल ये वक्त बढ़ कर 30 नवंबर तक हो जाता है। लेकिन इस बार विभाग ने 31 अक्टूबर तक ही अनुबंध करने का आदेश दिया है। विभाग ने सभी कोल्ड स्टोरेज मालिकों से कोल्ड स्टोर में रखे आलू के मालिकों का डेटा मांगा है।

हालांकि, केंद्र सरकार जो तीन कृषि कानून लेकर आई है उनमें से एक आवश्यक वस्तु अनधिनियम में बदलाव के बाद आलू, प्याज और टमाटर को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर कर दिया है। यानी इनके भंडारण की सीमा हटा दी गई है, कानून के तहत इन वस्तुओं का ज्यादा भंडारण करने पर जेल नहीं होगी। लेकिन प्याज के मामले में सरकार ने दोबारा स्टॉक लिमिट लगा दी है। नए नियमों के तहत थोक कारोबारियों को अब 25 टन प्याज का स्टॉक रखने की इजाजत है। जबकि खुदरा व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट दो टन निर्धारित की गई है। यानी सरकार आलू के मामले में भी स्टॉक लिमिट लगा सकती है।

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