किसान आंदोलन: ‘दिल्ली चलो’ का ऐलान, 5 नवंबर को होगा चक्का जाम

देशभर के प्रमुख किसान संगठनों ने दिल्ली की बैठक को ऐतिहासिक करार दिया। इसके साथ ही कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी चक्का जाम और दिल्ली चलो का नारा और तारीख भी तय की गई।

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कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के बीच देशभर के किसान संगठनों ने दिल्ली में बैठक की और आंदोलन की आगे की रणनीति तय की। 200 से ज्यादा किसान संगठनों वाली अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति यानी एआईकेएसएससी के साथ पंजाब से सरदार बलबीर सिंह राजेवाल और हरियाणा से गुरनाम सिंह चढ़ूनी के नेतृत्व वाले संगठन भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक के बाद किसान संगठनों ने साझा बयान जारी करते हुए ऐलान किया कि देशभर में 5 नवंबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक चक्का जाम किया जाएगा। इसके साथ ही 26- 27 नवंबर को देशभर से किसान राजधानी दिल्ली कूच करेंगे, जिसके लिए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया गया। 5 नवंबर के चक्का जाम को किसान संगठनों ने अखिल भारतीय रोड ब्लॉक का नाम दिया है। किसान संगठनों ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों के लिए राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक जन गोलबंदियां की जाएंगी।

दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारे में चल रही बैठक में एआईकेएससीसी के संयोजक वीएम सिंह ने कहा, ‘आज का देश के इतिहास में बड़ा दिन है। देश के लगभग सभी किसान संगठन एक मंच पर आए हैं। हम बाकी किसान संगठनों से भी बातचीत कर रहे हैं। हमने यह फैसला लिया है कि 5 नवम्बर को देश भर में 4 घंटे के लिए चक्का जाम किया जाएगा।’

बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के किसानों और विपक्षी दलों की सांठगांठ जैसे बयानों से भी किसान संगठन खासे नाराज दिखे और एकसुर में उनके बयानों की निंदा की। पंजाब के किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ‘एक महीने से किसान आन्दोलन चल रहा है जो पूरी तरह से अहिंसक है, कहीं भी किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। बीजेपी नेताओं और मंत्रियों के बयानों की हम निंदा करते हैं, इसमे कोई धार्मिक या राजनीतिक भावनाओं की बात नहीं है यह सिर्फ किसानों का मुद्दा है।’

महाराष्ट्र से स्वाभीमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने कहा कि ‘किसान संगठन आज एक मंच पर आ चुके हैं। जब तक तीनों कानून वापस नहीं होते, आन्दोलन जारी रहेगा। 2024 को वही पार्टी सत्ता में आएगी जो ये कानून वापस लेगी।’

केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े तीनों कानूनों को देश के कृषि विकास के लिए ऐतिसाहिक करार दिया था। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, ‘ ये तीन कानून ऐतिहासिक नहीं हैं, लेकिन इन कानूनों की वजह से किसानों में ऐतिहासिक एकता हो गई है। इन तीनों कानूनों के अलावा हम केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली कानून के भी खिलाफ हैं। इन कानूनों को हम रद्द करवा कर ही मानेंगे।’

हरियाणा में कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘इन कानूनों से सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि हर नागरिक प्रभावित होगा। पूरा देश उद्योगपतियों के कब्जे में चला जाएगा। सभी इनका विरोध कर रहे हैं, लेकिन तानाशाही तरीके से सरकार ने ये कानून पास किए। सरकार जितनी जल्दी मान जाए उसके लिए ही अच्छा है।’

बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पंजाब में सवारी गड़ियों के न चलने की स्थिति में माल गाड़ियों के संचालन को रोकने की भी कड़ी निन्दा की गई। किसान संगठनों ने कहा कि जब किसानों ने माल गाड़ियों को न रोकने का ऐलान कर दिया है, तब फिर सरकार ने इनके संचालन को क्यों रोका। संगठनों ने कहा कि सरकार किसानों को बदनाम करने के लिए ऐसा कर रही है, यह फैसला जनता के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का तरीका है और किसी भी जनवादी सरकार के लिए यह शर्मनाक काम है।

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