पूरे पंजाब में होगा रेल रोको आंदोलन

2 अक्तूबर से किसान संगठन पूरे पंजाब में करेंगे ‘रेल रोको’ आंदोलन

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...

किसान क्यूँ कर रहे हैं साइलोज़ का बहिष्कार?

हरियाणा हो या पंजाब, किसान अडानी के Silos में अपनी फसल देने से इंकार कर रहे हैं, हालाँकि Adani Agro Logistics का...

हरियाणा में फसल ख़रीदी को लेकर किसानों के अनुभव

हरियाणा में 1 April 2021 से गेहूँ की ख़रीदी शुरू हो गयी है लेकिन किसान मंडी में बारदाने की कमी से लेकर...

पंजाब के अमृतसर में में कृषि कानूनों के खिलाफ बीते पांच दिनों से जारी रेल रोको आंदोलन का दायरा अब बड़ा होने जा रहा है. प्रदेश के दूसरे किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. अमृतसर और फिरोजपुर में रेल रोको आंदोलन के तहत रेल की पटरियों पर धरना दे रही किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के साथ अब 31 किसान संगठन जुड़ने जा रहे हैं. सोमवार को हुई बैठक में किसान संगठनों ने एक जुट होने और आंदोलन को बड़ा करने का फैसला किया.

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ‘दो अक्टूबर से पूरे पंजाब में रेल रोको आंदोलन शुरू होगा. इसके अलावा आंदोलन को लेकर सभी किसान संगठनों के साथ बैठकें जारी है. इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी’.

केंद्र सरकार के लगातार आश्वासन के बावजूद किसानों के आंदोलन लगातार जारी हैं. शहीद भगत सिंह की जयंती पर सोमवार को रेल की पटरियों पर चल रहे धरनों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए.

किसान आंदोलन को देखते हुए पंजाब में रेलवे ने फिरोजपुर मंडल में 14 रेलमार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है. अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है. इससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. संसद से पारित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने पहले 24 सितंबर से 26 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन करने का ऐलान किया था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर एक अक्टूबर तक कर दिया गया है.

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के महासचिव एसएस पंधेर ने कहा, ‘किसान रेलवे ट्रैक पर अपने कपड़े उतारकर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि मोदी सरकार का अपनी मांगों की तरफ ध्यान खींच सकें.’ दरअसल, कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद बुलाने के बाद से धरना-प्रदर्शन जारी है. सोमवार को पंजाब से लेकर कर्नाटक तक किसानों ने प्रदर्शन किया. इसमें किसान संगठनों के साथ राजनीतिक दल भी शामिल रहे. सभी जगहों पर किसानों की एक ही मांग थी कि सरकार या तो इन कृषि कानूनों को वापस ले या फिर फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने वाला कानून बनाए.

लगभग एक हफ्ते पहले संसद से पारित हो चुके किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद अब कानून बन गए हैं.

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...