पूरे पंजाब में होगा रेल रोको आंदोलन

2 अक्तूबर से किसान संगठन पूरे पंजाब में करेंगे ‘रेल रोको’ आंदोलन

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

पंजाब के अमृतसर में में कृषि कानूनों के खिलाफ बीते पांच दिनों से जारी रेल रोको आंदोलन का दायरा अब बड़ा होने जा रहा है. प्रदेश के दूसरे किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. अमृतसर और फिरोजपुर में रेल रोको आंदोलन के तहत रेल की पटरियों पर धरना दे रही किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के साथ अब 31 किसान संगठन जुड़ने जा रहे हैं. सोमवार को हुई बैठक में किसान संगठनों ने एक जुट होने और आंदोलन को बड़ा करने का फैसला किया.

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ‘दो अक्टूबर से पूरे पंजाब में रेल रोको आंदोलन शुरू होगा. इसके अलावा आंदोलन को लेकर सभी किसान संगठनों के साथ बैठकें जारी है. इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी’.

केंद्र सरकार के लगातार आश्वासन के बावजूद किसानों के आंदोलन लगातार जारी हैं. शहीद भगत सिंह की जयंती पर सोमवार को रेल की पटरियों पर चल रहे धरनों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए.

किसान आंदोलन को देखते हुए पंजाब में रेलवे ने फिरोजपुर मंडल में 14 रेलमार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है. अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है. इससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. संसद से पारित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने पहले 24 सितंबर से 26 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन करने का ऐलान किया था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर एक अक्टूबर तक कर दिया गया है.

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के महासचिव एसएस पंधेर ने कहा, ‘किसान रेलवे ट्रैक पर अपने कपड़े उतारकर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि मोदी सरकार का अपनी मांगों की तरफ ध्यान खींच सकें.’ दरअसल, कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद बुलाने के बाद से धरना-प्रदर्शन जारी है. सोमवार को पंजाब से लेकर कर्नाटक तक किसानों ने प्रदर्शन किया. इसमें किसान संगठनों के साथ राजनीतिक दल भी शामिल रहे. सभी जगहों पर किसानों की एक ही मांग थी कि सरकार या तो इन कृषि कानूनों को वापस ले या फिर फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने वाला कानून बनाए.

लगभग एक हफ्ते पहले संसद से पारित हो चुके किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद अब कानून बन गए हैं.

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