पूरे पंजाब में होगा रेल रोको आंदोलन

2 अक्तूबर से किसान संगठन पूरे पंजाब में करेंगे ‘रेल रोको’ आंदोलन

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पंजाब के अमृतसर में में कृषि कानूनों के खिलाफ बीते पांच दिनों से जारी रेल रोको आंदोलन का दायरा अब बड़ा होने जा रहा है. प्रदेश के दूसरे किसान संगठनों ने भी इस आंदोलन में शामिल होने का ऐलान कर दिया है. अमृतसर और फिरोजपुर में रेल रोको आंदोलन के तहत रेल की पटरियों पर धरना दे रही किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के साथ अब 31 किसान संगठन जुड़ने जा रहे हैं. सोमवार को हुई बैठक में किसान संगठनों ने एक जुट होने और आंदोलन को बड़ा करने का फैसला किया.

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ‘दो अक्टूबर से पूरे पंजाब में रेल रोको आंदोलन शुरू होगा. इसके अलावा आंदोलन को लेकर सभी किसान संगठनों के साथ बैठकें जारी है. इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी’.

केंद्र सरकार के लगातार आश्वासन के बावजूद किसानों के आंदोलन लगातार जारी हैं. शहीद भगत सिंह की जयंती पर सोमवार को रेल की पटरियों पर चल रहे धरनों में बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए.

किसान आंदोलन को देखते हुए पंजाब में रेलवे ने फिरोजपुर मंडल में 14 रेलमार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी है. अधिकारियों के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है. इससे रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. संसद से पारित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने पहले 24 सितंबर से 26 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन करने का ऐलान किया था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर एक अक्टूबर तक कर दिया गया है.

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के महासचिव एसएस पंधेर ने कहा, ‘किसान रेलवे ट्रैक पर अपने कपड़े उतारकर प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि मोदी सरकार का अपनी मांगों की तरफ ध्यान खींच सकें.’ दरअसल, कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद बुलाने के बाद से धरना-प्रदर्शन जारी है. सोमवार को पंजाब से लेकर कर्नाटक तक किसानों ने प्रदर्शन किया. इसमें किसान संगठनों के साथ राजनीतिक दल भी शामिल रहे. सभी जगहों पर किसानों की एक ही मांग थी कि सरकार या तो इन कृषि कानूनों को वापस ले या फिर फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी देने वाला कानून बनाए.

लगभग एक हफ्ते पहले संसद से पारित हो चुके किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता विधेयक-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी मिलने के बाद अब कानून बन गए हैं.

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