गुजरात से कर्नाटक तक कृषि कानूनों का विरोध तेज

केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है

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दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात और कर्नाटक में केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिला. कर्नाटक में किसान संगठनों ने सोमवार को राज्यव्यापी बंद बुलाया और सड़कों पर उतर कर आंदोलन किया. कर्नाटक रायतू संघ और हसीरू सेने के कार्यकर्ताओं और किसानों ने बेंगलुरु में प्रदर्शन किया. किसानों के प्रदेश बंद का खासा असर देखा जा रहा है. सड़कों पर सन्नाटा पसरा है. सुरक्षा के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है.

कर्नाटक में किसान संगठनों के अलावा विपक्षी दल भी प्रदर्शन कर रहे हैं.जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में बाइक रैली निकाली. हालांकि, पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. इसके अलावा कांग्रेस ने भी पार्टी दफ्तर के सामने प्रदर्शन किया. इसमें प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार के अलावा प्रार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और प्रदेश के पूर्व सीएम सिद्धारमैया भी मौजूद रहे.

तमिलनाडु में डीएमके ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया. पार्टी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कांचीपुरम में कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

वहीं, गुजरात में कांग्रेस कार्यकर्ता कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. गांधीनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया. गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने केंद्र के कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताया. उन्होंने आगे कहा, ‘देश में अंग्रेजों के शासन में जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था, वैसे ही इस कानून से आने वाले समय में कंपनी का राज आ जाएगा.’

इससे पहले 25 सितंबर को देश भर के किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में भारत बंद बुलाकर प्रदर्शन कर चुके हैं. बावजूद इसके राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 27 सितंबर को संसद से पारित तीनों कृषि विधेयकों को मंजूरी दे दी. किसानों का कहना है कि इन कानूनों से खेती में कापोरेट्स की दखल बढ़ जाएगी.इसके अलावा कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) एक्ट के तहत चलने वाली मंडियां भी टैक्स में भेदभाव की वजह से खत्म हो जाएंगी, जिसका सहारा लेकर सरकार एमएसपी पर फसलों की खरीद बंद कर देगी. हालांकि, केंद्र सरकार इस आशंका को सिरे से खारिज कर रही है और इन कानूनों से किसानों को अच्छी कीमत मिलने के दावे कर रही है.

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