केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पारित विधेयकों पर क्या कहते हैं किसान नेता

पंजाब विधानसभा ने किसानों के आंदोलन के बीच केंद्र के कृषि कानूनों को राज्य में निष्प्रभावी बनाने वाले तीन कृषि विधेयक पारित किए हैं।

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पंजाब की विधानसभा ने मंगलवार को केंद्र के कृषि कानूनों को राज्य में प्रभावहीन करने वाले तीन कृषि विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल वीपी सिंह बदनोर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि, ‘विधानसभा में कृषि बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास हो गया है और हमने यहां राज्यपाल को उसकी प्रति सौंपी है। पहले यह राज्यपाल के पास जाएगा और फिर राष्ट्रपति के पास। अगर इससे भी कुछ नहीं होता है तो हमारे पास कानूनी तरीके भी हैं। मुझे उम्मीद है कि गवर्नर इसे मंजूरी देंगे। मैंने राष्ट्रपति से भी 2 से 5 नवंबर के बीच मिलने का समय मांगा है, पूरी विधानसभा ही उनके पास जाएगी।’

पंजाब सरकार इन विधेयकों को केंद्र के कृषि कानूनों को प्रदेश में प्रभावहीन करने वाला बड़ा फैसला बता रही है। इस पर किसानों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। पंजाब में रेल रोको आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सरवन सिंह ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘हमने जो सरकार के सामने मांगे रखी थी वो अमरिंदर सरकार ने नहीं मानी। हमने एपीएमसी एक्ट में 2005, 2013 और 2017 में किए गए संशोधनों को वापस लेने, फसल खरीद और निर्यात का अधिकार राज्य को देने की मांग की थी। यानी केंद्र की शक्तियों का विकेंद्रीकरण करने की मांग थी, लेकिन अमरिंदर सरकार ने यह नहीं किया।’ हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि ‘इन विधेयकों के पारित होने से कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की आवाज केंद्र सरकार तक जाएगी, जिससे सरकार पर दबाव पड़ेगा। हम यह नहीं मान सकते कि इन विधेयकों से केंद्र के कृषि कानूनों पर कोई असर पड़ेगा।’ रेल रोको आंदोलन जारी रखने की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा, ‘खेती कानूनों को रद्द करवाने के लिए आंदोलन ही एक मात्र विकल्प है।’

वहीं, पंजाब के किसान नेता रमनदीप सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि न तो गवर्नर इस पर साइन करेंगे न ही राष्ट्रपति,पंजाब सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, जहां कोर्ट केंद्र के कानूनों पर स्टे देगी, मामले की सुनवाई होगी, मामला लंबा खिंचने पर केंद्र सरकार राष्ट्रपति कानून लगाएगी, प्रर्दशनकारियों को ताकत के दम पर हटा दिया जाएगा, तब पंजाब मुश्किल, बहुत मुश्किल में होगा.

मध्य प्रदेश के किसान नेता राहुल राज ने पंजाब सरकार के कदम को अच्छा बताया है। हिंद किसान से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘दूसरे राज्यों में भी सरकारों को ऐसे कदम उठाने चाहिए। लेकिन ये एक लंबी प्रक्रिया है। ये जमीन पर उतर पाएगी या नहीं, ये कह पाना मुश्किल है। राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही ये विधेयक कानून बन पाएंगे, लेकिन बीजेपी ऐसा नहीं होने देगी।’

छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने भी पंजाब सरकार के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि ‘केंद्र सरकार के कृषि कानून असंवैधानिक, गैर-लोकतांत्रिक तथा किसान विरोधी है। संविधान में कृषि का क्षेत्र राज्य का विषय है, इसके बावजूद संसदीय प्रक्रिया का उल्लंघन करके और राज्यसभा में इन कानूनों के विरोध की अनदेखी करके ये कानून बनाये गए हैं। राज्यों को यह अधिकार है कि वह अपने राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करें।’

पंजाब विधानसभा ने जिन विधेयकों को पारित किया है उनमें पहला किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन विधेयक-2020, दूसरा मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक- 2020 और तीसरा आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक-2020 शामिल हैं। इन विधेयकों को कानून बनाने के लिए पहले राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना जरूरी है।

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