पराली जलाए बिना भी किसानों को मिल रहे जुर्माने के नोटिस

उत्तर प्रदेश में पराली जलाए बिना ही प्रशासन ने किसान को थमाया नोटिस

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धान की पराली को आग लगाने से रोकने के लिए सरकारें संवेदनशीलता दिखा रही है. लेकिन निचले क्रम की नौकरशाही किसानों के लिए मुसीबतें पैदा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में ऐसे किसानों को नोटिस दिया जा रहा है, जिन्होंने पराली ही नहीं जलाई है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सामने आया है। यह नकुड़ तहसील में रहने वाले किसान रामकुमार ने हिंद किसान को बताया कि प्रशासन ने उनके घर पराली जलाने के खिलाफ जुर्माना भरने का नोटिस भेजा है, जबकि उन्होंने अपने खेत में कोई पराली जलाई ही नहीं है।
प्रशासन या सरकार की लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पंजाब और हरियाणा में किसानों को ऐसे मामलों से जूझना पड़ा है। एक बार फिर धान की कटाई का सीजन शुरू हो रहा है। ऐसे में किसानों के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज होने का अंदेशा बढ़ गया है।
इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखी चिट्ठी में पराली प्रबंधन के नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की ओर से विकसित खास किस्म के केमिकल का हवाला दिया है, जिसे पराली पर डालने पर वह बहुत जल्द गलकर खाद बन जाती है। दिल्ली सरकार बहुत जल्द इसे प्रदेश में इस्तेमाल करने जा रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दूसरे राज्यों में भी किसानों के बीच ऐसे उपायों को बढ़ावा देने की अपील की है।


दिल्ली-एनसीआर में हर साल जाड़े के दिनों में वायु प्रदूषण और धुंध के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने को वजह बताया जाता है। हालांकि, किसान ऐसा नहीं मानते हैं। वे इसके लिए फैक्ट्रियों और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं को वजह बताते हैं। बीते साल कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन भी दिल्ली में हवा की खराब क्वालिटी के लिए किसानों को दोष देने पर सवाल उठा चुके हैं। ट्वीटर पर उन्होंने लिखा था कि हमें किसानों को दोषी ठहराना बंद करना चाहिए, क्योंकि इससे कुछ हासिल नहीं होगा. इसकी जगह पर हमें ऐसे तरीके अपनाने चाहिए, जो आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से कारगर हों।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब की सरकार को निर्देश दिया था कि छोटे और मझोले किसानों को सात दिन के भीतर प्रति कुंतल पर 100 रुपये की सहायता दे, ताकि वे पराली को जलाने की जगह दूसरे तरीके से उसे निपटा सकें। लेकिन किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें पिछले साल का मुआवजा अब तक नहीं मिल पाया है। इस बीच पंजाब और हरियाणा सरकारें किसानों को सब्सिडी पर पराली प्रबंधन की मशीनें मुहैया कराने का दावा कर रही हैंं।

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