हरियाणा: सरकार को अल्टीमेटम, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस हों वरना बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहें

बीकेयू ने खट्टर सरकार पर किसानों को फंसाने और आंदोलन कमजोर करने का आरोप लगाया है। साथ ही सरकार को 29 अक्टूबर तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की है।

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हरियाणा में किसान आंदोलन के बीच किसानों पर दर्ज किए मुकदमों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को चण्डीगढ़ में भारतीय किसान यूनियन ने प्रेस वार्ता में किसानों पर दर्ज मुकदमों को सफेद झूठ करार देते हुए सरकार से 29 तारीख तक मुकदमे वापस लेने की मांग की।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने हिंद किसान से फोन पर बातचीत में कहा, ‘किसानों पर जिस मामले में मुकदमें दर्ज किए गए हैं वह सफेद झूठ है। घटना का पूरा वीडियो हमारे पास है जिसमे साफ पता चल रहा है कि उस घटना से किसानों का कोई लेना- देना नहीं है। यह किसानों को फंसाने और आंदोलन कमजोर करने की कोशिश है, लेकिन ऐसा होगा नहीं।’

किसान नेताओं ने राज्य की खट्टर सरकार को 29 अक्टूबर तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की है। गुरनाम चढूनी ने कहा, ’29 अक्टूबर तक का वक़्त दे रहे हैं सरकार को, सभी फर्जी मुकदमे वापस ली3 जाएं। 29 तारिख को हम अंबाला में किसान महापंचायत करेंगे। अगर सरकार नहीं मानती है तो वहीं से नया आंदोलन शुरू किया जाएगा।’

इसके साथ ही भारतीय किसान यूनियन ने 25 नवंबर को यानी दशहरे के दिन हरियाणा में जिला स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंकने का भी एलान किया है। जबकि 5 नवम्बर को देश भर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर किसान कृषि कानूनों का विरोध करेंगे।

बीते हफ्ते बुधवार को अंबाला के नारायणगढ़ में कृषि कानूनों के समर्थन में बीजेपी की यात्रा को कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने रोक दिया था। इसी दौरान बीजेपी की यात्रा में शामिल एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों पर मुकदमे दर्ज किए हैं।  

प्रेस वार्ता में बीकेयू ने कहा बीजेपी की रैली में शामिल किसान की मौत हार्ट अटैक से हुई है। इसमे विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर नहीं बल्कि बीजेपी की रैली के आयोजकों पर मामला दर्ज होना चाहिए। किसान संगठन ने कहा कि अगर खट्टर सरकार उनकी बात नहीं सुनती है तो सरकार को किसानों के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

हरियाणा और पंजाब में बीते कई महीनों से कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। किसान इन कानूनों को रद्द करने या न्यूनमत समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी देने वाला कानून बनाने की मांग कर रहे हैं।

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