हरियाणा: किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग, दशहरे के दिन होगा पुतला दहन

किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के मांग के साथ ही किसानों ने आंदोलन को और तेज करने का भी ऐलान किया है।

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हरियाणा कृषि कानूनों के विरोध का गढ़ बनता जा रहा है। पड़ोसी राज्य पंजाब की ही तरह यहां भी किसान लगातार इन कानूनों के खिलाफ सड़क पर उतरे हुए हैं। शनिवार को कुरुक्षेत्र के कंबोज धर्मशाला में भारतीय किसान यूनियन की बैठक के बाद आंदोलन की नई रणनीति पर चर्चा की गई। जिसमें हाइवे जाम से लेकर सड़कों पर पुतले फूंकने तक की तारीखें तय की गई हैं।

बैठक में नारायणगढ़ में हुए हादसे के मामले में किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की भी मांग की गई। बुधवार को अंबाला के नारायणगढ़ में कृषि कानूनों के समर्थन में बीजेपी की यात्रा के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद प्रशासन ने कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों पर मुकदमे दर्ज किए हैं।  

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने हिंद किसान से फोन पर बातचीत में कहा, ‘बीजेपी की रैली का वीडियो सामने आ चुका है, जिससे साफ पता चलता है कि रैली में उस व्यक्ति की मौत से प्रदर्शन कर रहे किसानों को कोई लेना देना नहीं है। इसके बावजूद 7 किसानों पर नामजद और 15 अन्य किसानों के नाम से 302 का मुकदमा दर्ज किया गया है। हम सरकार को 29 तारीख तक का वक्त देते हैं, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।‘

बैठक में आंदोलन के आगे की रणनीति भी तय की गई है। 25 अक्टूबर को दशहरा है और इस दिन किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंक कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

बीकेयू के मीडिया प्रभारी राकेश कुमार बैंस ने हिंद किसान से कहा, ’25 तारीख को दशहरे के दिन हम पीएम मोदी का पुतला फूकेंगे। इसके बाद 29 तारीख को अंबाला में किसानों की महापंचायत होगी, जहां आंदोलन के आगे की रणनीति तय की जाएगी। जबकि 5 नवंबर को देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम किया जाएगा।‘

हरियाणा में किसान आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पंजाब में शिरोमणी अकाली दल को किसान आंदोलन के दवाब में झुककर एनडीए गठबंधन से बाहर आना पड़ा और केंद्र सरकार में मंत्रीपद भी छोड़ना पड़ा। इसी तर्ज पर हरियाणा में किसान जननायक जनता पार्टी यानी जेजेपी से खट्टर सरकार से समर्थन वापस लेने और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि जेजेपी के अंदर भी कृषि कानूनों और किसान आंदोलन को लेकर विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।

बरवाला से जेजेपी के विधायक जोगीराम सिहाग कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा आवास बोर्ड के अध्यक्ष का पद ठुकरा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को एमएसपी की गारंटी न मिलने तक राज्य सरकार में लाभ का पद न लेने का ऐलान किया।

अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान जोगीराम सिहाग के फैसले का स्वागत और धन्यवाद करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपील की कि जो भी जनता का उम्मीदवार है, उन सबको किसानों के बीच आ जाना चाहिए।

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