छत्तीसगढ़: दुगली आगजनी कांड पर सीपीआई (एम) की रिपोर्ट

कुछ दिन पहले धमतरी जिले के एक गांव में कुछ आदिवासी परिवारों के घरों में आगजनी और फसलों को बर्बाद करने का मामला सामने आया था। सीपीआई (एम) ने इस मामले पर एक रिपोर्ट जारी की है।

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...

किसान क्यूँ कर रहे हैं साइलोज़ का बहिष्कार?

हरियाणा हो या पंजाब, किसान अडानी के Silos में अपनी फसल देने से इंकार कर रहे हैं, हालाँकि Adani Agro Logistics का...

हरियाणा में फसल ख़रीदी को लेकर किसानों के अनुभव

हरियाणा में 1 April 2021 से गेहूँ की ख़रीदी शुरू हो गयी है लेकिन किसान मंडी में बारदाने की कमी से लेकर...

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के दुगली गांव में 13 अक्टूबर को आदिवासी परिवारों के घरों को उजाड़ने के मामले में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई (एम ) ने अपनी रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 13 अक्टूबर को 20 नहीं बल्कि 35 घरों में आगजनी की गई थी। सीपीआई (एम) ने आरोप लगाया है कि इस हमले का नेतृत्व कांग्रेस नेता शंकर नेताम कर रहे थे, जो दुगली वन प्रबंधन समिति का अध्यक्ष भी है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि खुद शंकर नेताम ने  मीडिया को दिए अपने बयान में स्वीकार किया है कि उसने इन घरों को हटाया है।

सीपीआई (एम) की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में तीन बार इन आदिवासियों पर हमला करके उनके घरों को जलाया गया है,  फसलों को नष्ट किया गया है और पीड़ितों का सामाजिक बहिष्कार जारी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन पांच वर्षों में पीड़ितों को 2 करोड़ रुपयों का नुकसान पहुंचा है। पीड़ितों के वनाधिकार के आवेदन बिना कोई कारण बताये चार बार निरस्त किए गए हैं। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि इस आगजनी कांड के 15 दिनों बाद और राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी पीड़ितों की सुध लेने उनके गांव नहीं पहुंचा है।

सीपीआई (एम) ने अपनी रिपोर्ट ‘विस्थापन के लिए आगजनी व सामाजिक बहिष्कार और न्याय के लिए अंतहीन इंतज़ार की कहानी’ शीर्षक से साथ पेश की है। पार्टी के दावा है कि इस रिपोर्ट के लिए उसके पदाधिकारियों और स्थानीय नेताओं ने 26-27 अक्टूबर 2020 को क्षेत्र का दौरा किया, पीड़ित परिवारों और अन्य ग्रामीणों से बातचीत की, घटनास्थल का दौरा किया और आवश्यक तथ्य, दस्तावेज और जानकारियां एकत्रित की।

सीपीआई (एम) के राज्य सचिव संजय पराते ने मांग की है कि हमलावरों को गैर-जमानती धाराओं में गिरफ्तार किया जाए, सभी पीड़ित परिवारों को हुए आर्थिक नुकसान और सामाजिक बहिष्कार के कारण उनकी प्रतिष्ठा को पहुंची ठेस की भरपाई के लिए दस-दस लाख रूपये मुआवजा दिया जाए और उन पर  दर्ज हुए फर्जी मुक़दमे वापस लिए जाये। इसके साथ ही पीड़ित आदिवासी परिवारों को वनाधिकार पट्टे देने जैसी मांग भी की गई है।

यह भी पढ़िए- छत्तीसगढ़: बर्बाद हुए आदिवासी परिवार, क्यों बैठे हैं धरने पर

क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में एक गांव है, जिसका नाम है दुगली। गांव में आदिवासी रहते हैं जो खेती-बाड़ी और वनोपज से अपना जीवन यापन करते हैं। 13 अक्टूबर को गांव के 20 आदिवासी परिवारों के घरों को या कहें कि झोपड़ियों को तोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया। उनके खेतों पर जानवर छोड़ दिए, पूरी फसल चरा दी गई। यहां तक कि उनके सामाजिक बहिष्कार का ऐलान भी कर दिया गया। आरोप है कि वन ग्राम समिति और इस पंचायत के सरपंच और सचिव की अगुवाई में ये घटना हुई।

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

गाँव में कोरोना से लड़ने की क्या हो तैयारी?

MP के हरदा ज़िले के रोल गाँव में क़रीब 30 लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गयी, 350 परिवार वाले गाँव के...

क्या है ज़रूरी – ज़िंदगी या चुनाव?

29 April 2021, कोरोना की ख़तरनाक जानलेवा लहर के बीच उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए आख़री चरण का मतदान पूरा हुआ,...

ज़िंदगी या चुनाव- क्या है ज़रूरी?

कोरोना की मौजूदा लहर में हर दिन जिंदगियाँ रेत की तरह फिसल रही हैं, समाज में लोग अपनों को खो रहे हैं...