किसानों की मांगों को लेकर यूपी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन

किसान आंदोलन: पूरे हुए 4 महीने, क्या हुआ हासिल?

कृषि क़ानूनों का विरोध और MSP की गारंटी की माँग को लेकर देश भर में संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन के 120...

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...

कृषि आंदोलन: क्या है किसानों का मूड?

कृषि आंदोलन को 115 दिन होने को आए, इस बीच ये आंदोलन पंजाब-हरियाणा- उत्तर प्रदेश-राजस्थान-मध्य प्रदेश के बाद अब उन राज्यों में...

उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदेश भर में जिलावार धरना प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखनऊ, झांसी, लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों में जिलाधिकारी दफ्तर के बाहर धरना दिया और राज्य में धान की एमएसपी पर खरीद में सुस्ती, गन्ना का बकाया भुगतान और  बिजली बिल का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने सभी जिलों में किसानों की समस्याओं पर जिलाधिकारियों को राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया।

यूपी कांग्रेस ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘ये कैसी उप्र.सरकार! किसानों से लाखों रुपये जमा करा लिए उन्हें ट्यूबबेल नहीं दिया।लखेरी बांध के लिए जमीन ले ली,उसका मुआबजा नहीं दिया। किसानों से बीमा प्रीमियम वसूला और फसल बीमा क्लेम नहीं दिया। ये खून चूसने वाली सरकार है। झांसी कलेक्ट्रेट में किसान कांग्रेस का हल्ला बोल.’

कांग्रेस के राज्य सभा सांसद पीएल पुनिया ने भी राज्य की आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘उप्र में किसान धान को समर्थन मूल्य के आधे दामों तक बेचने के लिए मजबूर है। सरकार किसानों को फसल का उचित मूल्य देने में उदासीन है। भाजपा सरकार की हर नीति और निर्णय किसान के लिए विनाशकारी साबित हो रहे है, आखिर अन्नदाता के साथ ये अन्याय कबतक ?’

यूपी में धान खरीद की सुस्त रफ्तार को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस लगातार प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार को घेर रही है। बुधवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद न होने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘भाजपा सरकार किसानों का हक मारने वाले बिलों पर सरकारी खाट सम्मेलन तो कर रही है लेकिन किसानों का दर्द नहीं सुन रही। यूपी में लगभग सभी जगहों पर किसान अपना धान 1868 रू/क्विंटल एमएसपी से 800 रू कम 1000-1100रू/क्विंटल पर बेंचने को मजबूर हैं। ऐसा तब है जब एमएसपी की गारंटी है। सोचिए जब एमएसपी की गारंटी खत्म हो जाएगी तब क्या होगा?’

लोकप्रिय

कृषि विधेयकों के खिलाफ किसान आंदोलनों के बीच फसलों की एमएसपी में इजाफा

कृषि से जुड़े विधेयकों को लेकर किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष संसद से पारित हो चुके इन विधेयकों को किसान...

कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज...

क्या एमएसपी के ताबूत में आखिरी कील साबित होंगे नए कृषि विधेयक

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने जिस अफरा-तफरी में तीनों कृषि अध्यादेशों लाई, इन्हें विधेयक के रूप में संसद...

Related Articles

किसान महापंचायत की गूंज, दक्षिण भारत में भी

किसान महापंचायत की गूंज दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दी, BKU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत दूसरे किसान...

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसानों का फूटा ग़ुस्सा

किसान आंदोलन को लगभग 4 महीने होने को आए, किसान सरकार की बेरुख़ी और उनकी माँग अनसुनी करने को लेकर काफ़ी ख़फ़ा...

किसान आंदोलन: राजनीति या आजीविका की लड़ाई?

किसान आंदोलन देश के अलग अलग राज्यों में बढ़ता जा रहा है, जिन ५ राज्यों में चुनाव है वहाँ केंद्र में सत्ताधारी...