पंजाब में आंदोलन कर रहे किसानों के साथ सीएम अमरिंदर ने की बैठक

सीएम अमरिंदर सिंह के साथ बैठक में 31 किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

पंजाब में कृषि कानूनों का लगातार विरोध जारी है। इस बीच रेल रोको आंदोलन कर रहे किसानों और दूसरे किसान संगठनों के साथ सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की बैठक की। इसमें प्रदेश के 31 किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री से विधानसभा का विशेष सत्र बुनाने और केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को खारिज करने की मांग रखी। ट्विटर पर सीएम अमरिंदर सिंह ने लिखा, ‘हमारी सरकार आखिरी दम तक किसानों और उनकी आजीविका की रक्षा के लिए लड़ेगी। हम किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ सभी कानूनी उपायों का विकल्प तलाश रहे हैं और किसानों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होने देंगे।’

प्रदेश में रेल रोको आंदोलन चला रहे किसान 24 सिंतबर से अमृतसर और फिरोजपुर में रेल की पटरियों पर धरना दे रहे हैं। इसमें प्रदेश के अन्य संगठनों ने 1 अक्टूबर से शामिल होने का ऐलान किया है। इससे आंदोलन के बड़ा रूप लेने की आशंका जताई जा रही है। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों के प्रतिनिधियों के साथ यह बैठक बुलाई है। इस बीच किसान आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने 14 जोड़ी ट्रेनों को अस्थायी तौर पर रद्द किया है।

किसान जिन कानूनों का विरोध कर रहे हैं, उनमें किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम-2020, किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन व कृषि सेवा समझौता अधिनियम-2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम-2020 शामिल हैं। उनका साफ कहना है कि इन कानूनों से खेती में पूंजीपतियों की दखल बढ़ जाएगी, जिससे आगे चलकर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से हाथ धोना पड़ेगा.

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