केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ अब छत्तीसगढ़ सरकार ने पारित किया विधेयक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र के कानूनों से छेड़छाड़ नहीं कर रही है बल्कि राज्य के किसानों को सुरक्षित करने का काम कर रही है, ताकि किसानों को ठगा न जा सके।

खेती में, कैसा हो किसान के विकास का मॉडल?

कृषि क़ानूनों के लेकर सरकार की तरफ़ से एक बार फिर से किसान संगठनों और नेताओं को चिट्ठी भेजी गयी है, उसमें कुछ नया नहीं सिवाय इसके कि सरकार खुले दिमाग़ और नीयत से मौजूदा गतिरोध ख़त्म करना चाहती है, ताज़ा चिट्ठी में किसानों की मुख्य माँग के अनुसार कोई प्रस्ताव नहीं, ऐसे में क्या हो वो विकास का मॉडल जो कृषि प्रधान देश भारत को suit करे, ख़ास बातचीत कृषि विशेषज्ञ, देविंदर शर्मा जी के साथ।

‘किसान दिवास’ पर किसान के ‘मन की बात’

किसान दिवास पर सुनें कि तीन कृषि क़ानून को लेकर वो क्या चाहते हैं, उनकी नज़र में कौन भ्रम फैला रहा है, आंदोलन में देश की महिला किसानों की कितनी भागीदारी है? क्या हैं उनके डर, क्यूँ दूर दराज़ के राज्यों से किसान आंदोलन में भाग लेने नहीं आ पा रहे, अगले कुछ दिनों में और कितने किसान दिल्ली कूच कर रहे हैं, किसान दिवास पर ख़ास बातचीत।

‘श्रद्धांजलि दिवस’ पर अन्नदाता को नमन

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MP के किसानों से ही ‘मन की बात’ क्यूँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान तीन कृषि क़ानून को लेकर विरोध कर रहे हैं, मौजूदा गतिरोध पर प्रधान मंत्री की तरफ़ से कुछ रास्ता दिखाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं, मोदी जी ने इन क़ानून का बखान करते हुए मध्य प्रदेश के किसानों को सम्बोधित किया, msp की गारंटी और कृषि क़ानून वापस लिए जाने की माँग पर एक बार फिर उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उन्हीं जवाब को तलाशने की कोशिश इस बातचीत में।

कृषि क़ानून: नीति, नेता, नीयत पवित्र फिर गतिरोध क्यूँ?

कृषि क़ानून से जुड़ी अहम तारीख़ों और शेयर बाज़ार में रिलायंस कम्पनी के शेयरों की चाल पर बारीकी से नज़र बनाएँ तो इनके बीच का नाता समझ पाएँगे, फिर शायद ये भी समझ आ जाए कि नीति, नेता और नीयत की पवित्रता के बावजूद किसान और सरकार के बीच गतिरोध क्यूँ?

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने विधान सभा मंडी अधिनियम में संशोधन कर दिया है। राज्य की विधान सभा में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ विधान सभा में संशोधन करने वाला छत्तीसगढ़ पंजाब के बाद दूसरा राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र के कानूनों से छेड़छाड़ नहीं कर रही है बल्कि राज्य के किसानों को सुरक्षित करने का काम कर रही है, ताकि किसानों को ठगा न जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र के कृषि कानून किसानों के लिए नहीं, पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं।

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि इस संशोधन विधेयक का कोई भी प्रावधान केन्द्र के कानून का उल्लंघन नहीं करता है। उन्होंने कहा, हम केन्द्रीय कानूनों का अतिक्रमण नहीं कर रहे हैं। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों और अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था कृषि पर आधारित है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से कृषि व्यवस्था में पूंजीपतियों का नियंत्रण बढ़ने के साथ ही महंगाई बढ़ने, समर्थन मूल्य में धान खरीदी और पीडीएस प्रणाली के प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक से किसानों, गरीबों, मजदूरों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सकेगी।

छत्तीसगढ़ मंडी कानून में क्या संशोधन हुए

  • कृषि उपज के खरीद-बिक्री, भंडारण जैसे जगहों को डीम्ड मंडी घोषित किया गया
  • राज्य सरकार के अधिसूचित अधिकारी को मंडी की जांच का अधिकार
  • अनाज की आवाजाही में भंडारण की तलाशी और जब्त करने का अधिकार
  • मंडी समिति और अधिकारियों पर मुकदमा दायर करने का अधिकार
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेंडिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान संचालन राज्य सरकार के नियम के मुताबिक होगा
  • किसी भी तरह की जानाकारी छिपाने या गलत जानकारी देने पर 3 महीने की सजा या 5 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान, दूसरी बार गलती होने पर 6 महीने की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान

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