केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ अब छत्तीसगढ़ सरकार ने पारित किया विधेयक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र के कानूनों से छेड़छाड़ नहीं कर रही है बल्कि राज्य के किसानों को सुरक्षित करने का काम कर रही है, ताकि किसानों को ठगा न जा सके।

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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने विधान सभा मंडी अधिनियम में संशोधन कर दिया है। राज्य की विधान सभा में छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2020 चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ विधान सभा में संशोधन करने वाला छत्तीसगढ़ पंजाब के बाद दूसरा राज्य बन गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र के कानूनों से छेड़छाड़ नहीं कर रही है बल्कि राज्य के किसानों को सुरक्षित करने का काम कर रही है, ताकि किसानों को ठगा न जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र के कृषि कानून किसानों के लिए नहीं, पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं।

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि इस संशोधन विधेयक का कोई भी प्रावधान केन्द्र के कानून का उल्लंघन नहीं करता है। उन्होंने कहा, हम केन्द्रीय कानूनों का अतिक्रमण नहीं कर रहे हैं। इस संशोधन विधेयक के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों और अधिकारों की रक्षा हो सकेगी।

कृषि मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था कृषि पर आधारित है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के नए कानूनों से कृषि व्यवस्था में पूंजीपतियों का नियंत्रण बढ़ने के साथ ही महंगाई बढ़ने, समर्थन मूल्य में धान खरीदी और पीडीएस प्रणाली के प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक से किसानों, गरीबों, मजदूरों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सकेगी।

छत्तीसगढ़ मंडी कानून में क्या संशोधन हुए

  • कृषि उपज के खरीद-बिक्री, भंडारण जैसे जगहों को डीम्ड मंडी घोषित किया गया
  • राज्य सरकार के अधिसूचित अधिकारी को मंडी की जांच का अधिकार
  • अनाज की आवाजाही में भंडारण की तलाशी और जब्त करने का अधिकार
  • मंडी समिति और अधिकारियों पर मुकदमा दायर करने का अधिकार
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेंडिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान संचालन राज्य सरकार के नियम के मुताबिक होगा
  • किसी भी तरह की जानाकारी छिपाने या गलत जानकारी देने पर 3 महीने की सजा या 5 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान, दूसरी बार गलती होने पर 6 महीने की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान

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