केंद्र सरकार ने किसानों को मिलने के लिए भेजा न्योता, किसानों ने कहा बैठक के बाद होगा फैसला

12 नवंबर को बैठक के बाद सरकार के न्योते पर कुछ कहेंगे- बलबीर सिंह राजेवाल

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे पंजाब के किसान संगठनों को एक बार फिर केंद्र सरकार ने मिलने के लिए न्योता भेजा है। मंगलवार को कृषि मंत्रालय की तरफ से प्रदेश के 29 किसान संगठनों को पत्र भेज कर 13 नवंबर को सुबह 11 बजे मिलने के लिए दिल्ली बुलाया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव की ओर से किसान संगठनों को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ बातचीत के लिए निमंत्रण भेजा गया है।

हालांकि, सरकार के बुलावे पर किसान संगठनों ने अभी कुछ कहने से इनकार किया है। भारतीय किसान संघ (राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हम लोगों ने 12 नवंबर को सभी किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई है। बैठक के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।’

बातचीत पर सरकार की कोशिशों पर भी किसान संगठन सवाल उठा रहे हैं। भारतीय किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष सरवन सिंह ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘सरकार सिर्फ किसानों के साथ बातचीत के माहौल का दिखावा कर रही है। हमारा कहना है कि सरकार माल गाड़ियां बंद करके कौन सा सही माहौल कर रही है। आप माल गाड़ियां चलाईये न।’

उन्होंने ये भी कहा कि ‘देश के सभी किसान यूनियन को सरकार क्यों नहीं बुला रही है सिर्फ पंजाब के किसानों को क्यों बुलाया जा रहा है। ये किसान संगठनों में फूट डालने का काम करेगा। कृषि कानून पूरे देश के किसानों की समस्या है तो फिर सिर्फ पंजाब के किसानों को ही क्यों बुलाया जा रहा है।’

अक्टूबर में बातचीत बेनतीजा रही थी

इससे पहले भी केंद्र सरकार और किसानों के बीच बातचीत नहीं हो पाई थी। 14 अक्टूबर को पंजाब का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में सरकार के न्योते पर बैठक के लिए पहुंचा था। लेकिन कृषि मंत्री और सरकार के नुमाइंदे न होने की वजह से किसान नारज हो गए थे और बिना बातचीत के ही बाहर निकल आए थे। इसके बाद किसानों ने कृषि भवन के बाहर कृषि कानूनों की प्रतियां जला कर और सरकार के खिलाफ नारे लगा कर प्रदर्शन किया था।

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ यूं तो देश के कई राज्यों में किसान आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखने को मिल रहा है। पंजाब में किसान संगठन सितंबर महीने से रेल रोको आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि किसान संगठन कुछ दिनों पहले माल गाड़ियों के संचालन को बाधित न करने का ऐलान कर चुके हैं। नाराज किसानों ने 5 नवंबर को देश भर में चक्का जाम भी किया था। जिसके बाद किसानों ने 26 -27 नवंबर को दिल्ली कूच करने का ऐलान कर रखा है।

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