यूपी में पराली जलाने वाले किसानों पर मामले दर्ज, विपक्ष ने उठाए केंद्र और आदित्यनाथ सरकार पर सवाल

सरकार किसानों पर ज्यादती कर रही है, किसानों से तो पराली जलाने का जुर्माना वसूला जाता है लेकिन फैक्ट्रियों से नहीं - बीकेयू

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उत्तर प्रदेश में पराली जलाने वाले किसानों पर मुकदमें दर्ज करने को लेकर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार सवालों के घेरे में है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अब तक लगभग 2000 किसानों पर मुकदमें दर्ज किए गए हैं। सहारनपुर में पराली जलाने के आरोप में छह किसानों को जेल में डाले जाने को लकेर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर लिखा क्या प्रदूषण के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार हैं? प्रदूषण फैलाने के असली जिम्मेदारों पर करवाई कब होगी? उन्होंने सवाल करते हुए लिखा कि किसान का वोट- कानूनी, किसान का धान- कानूनी, किसान की पराली- गैरकानूनी? उप्र सरकार ने सहारनपुर में किसानों को जेल में डाला, उन्हें छुड़वाने के लिए कांग्रेस के साथियों का धन्यवाद।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी किसानों को जेल में डाले जाने के मामले में सवाल उठाया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘पर्यावरण प्रदूषण के बहाने पराली जलाने के नाम पर किसानों को जेलों में डालने वाले महानुभाव बताएं कि राजनीतिक प्रदूषण फैलाने वालों को जेल कब होगी. किसान अब भाजपा का खेत खोद देंगे.’

हर साल सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए पराली जलाने को जिम्मेदार बताया जाता है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए केंद्र सरकार 30 अक्टूबर को अध्यादेश के जरिए एक कानून लेकर आई थी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन कानून, 2020 के तहत दिल्ली और आस-पास के इलाकों में प्रदूषण फैलाने का दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की जेल की सजा और एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। इसकी निगरानी करने के लिए एक आयोग बनाया गया है जो प्रदूषण की निगरानी और सजा भी दे सकेगा। ये आयोग वाहन प्रदूषण, धूल कण प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण के साथ-साथ पराली जलाने के मसले की भी मोनीटरिंग करेगा।

सरकार के इस कानून से किसानों को उन पर सख्त कार्रवाई का डर सता रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हिंद किसान से कहा कि ‘सरकार किसानों पर ज्यादती कर रही है।’ उन्होंने कहा कि ‘हम 7 नवंबर को मुजफ्फरनगर में महापंचायत करके इस मुद्दे को उठाएंगे और सरकार से पराली जलाने पर सहारनपुर में गिरफ्तार किसानों को छोड़ने और दूसरे किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने की मांग करेंगे।’

कांग्रेस भी सरकार के इस फैसले को किसानों को परेशान करने का एजेंडा बता रही है। कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने कृषि कानून को लेकर एक तरफ जहां केंद्र सरकार पर हमला किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि ‘पराली जलाने वाले किसानों को जेल में डालना केंद्र सरकार का एजेंडा है।’

भले ही दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा हो, लेकिन किसान फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुंए और वाहनों को इसकी वजह बताते हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार किसानों पर मुकदमें तो दर्ज कर देती है लेकिन पराली निपटारे के लिए किसानों को मुआवजा देने पर कोई जोर नहीं दिया जाता।

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