उत्तर प्रदेश में बेमियादी धरने पर गन्ना किसान

7 नवंबर को मुज़फ्फरनगर में चारो तरफ से घुसेंगे ट्रेक्टर शिव चौक पर होगा जमावड़ा - राकेश टिकैत

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उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। गन्ने का दाम न बढ़ने और बकाया भुगतान न मिलने से नाराज किसान प्रदेश के हर जिले में जिलाधिकारी दफ्तर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई में अपनी मांगों को लेकर किसान बीते छह दिन से मुजफ्फरनगर जिले में धरने पर बैठे हैं। लेकिन जब प्रशासन ने नहीं सुनी तो किसानों ने अब दूसरे जिलों में भी धरना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि 25 अक्टूबर से गन्ना का नया पेराई सत्र शुरू हो गया है लेकिन प्रदेश में चीनी मिलों पर अब भी किसानों का लगभग आठ हजार करोड़ रुपये बकाया है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि ‘अगर किसान सड़कों पर है, तो अधिकारियों को भी घर में सोने नहीं देंगे। बीते चार साल से गन्ना के दाम नहीं बढ़े हैं, जबकि उत्पादन लागत में दोगुना वृद्धि हुई है।’ उन्होंने ये भी कहा कि ‘सरकार किसान की कमर तोड़ रही है। उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों का 8 हजार करोड़ बकाया है और बकाया भुगतान को लेकर सरकार के सभी वादे जुमले साबित हुए है। मूल्य में वृद्धि और बकाया भुगतान के बिना किसान घर वापस नहीं जाएगा। यह आंदोलन चलता रहेगा।’

किसानों ने 7 नवंबर को मुजफ्फरनगर के शिवचौक पर किसान पंचायत बुलाने का भी ऐलान किया है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि ‘ नया पेराई सत्र शुरू हो गया है लेकिन अब तक किसानों को बकाया भुगतान नहीं मिल पाया है। अगर सरकार जल्द भुगतान नहीं करती तो यह आंदोलन जारी रहेगा और इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा’

हालांकि, 29 अक्टूबर को एथेनॉल की कीमतों में 5 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। केंद्र सरकार ने शुगर से बनने वाले एथेनॉल की कीमत 62.65 रुपये प्रति लीटर, बी हैवी की कीमत 57.61 रुपये और सी हैवी की कीमत 45.69 रुपये प्रति लीटर कर दी है। सरकार के मुताबिक, इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। सरकार का कहना है कि एथेनॉल के महंगा होने से शुगर मिल मालिकों के पास अतिरिक्त पैसा आएगा और वह गन्ना किसानों का ज्यादा से ज्यादा भुगतान कर सकेंगे।

हालांकि, सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए बीकेयू प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने हिंद किसान से कहा कि ‘सरकार कभी चीनी के दाम बढ़ाती है कभी इथेनॉल के लेकिन इससे किसानों को नहीं व्यापारियों और चीनी मिलों को ही फायदा होता है, किसानों के हाथ तो खाली ही हैं।’

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कहते हैं कि ‘देश में डिजिटल पेमेंट करने की बात कहते हैं लेकिन वो किसानों के लिए कुछ ऐसा क्यों नहीं करते की इधर गन्ना की फसल बेचें और तुरंत उनका भुगतान हो।’

किसानों की सरकार से मांग

1- गन्ने की कीमत 450 रूपये प्रति क्विटंल की जाए।

2- किसानों के गन्ना का लगभग 8,000 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान किया जाए।

3- न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद को कानून बनाया जाए।

4- किसानों के कोल्हू पर फिक्स चार्ज के आधार पर बिल लिया जाय।

5- गन्ना नियंत्रण कानून से ब्याज समाप्त करने की धारा को खत्म किया जाए।

6- धान के क्रय केंद्र पर किसानों की खरीद की जाए। मक्का और बाजरा के भी क्रय केंद्र खोले जाएं।

किसानों का कहना है कि आंदोलन के बाद भी सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। किसानों ने मांगे न माने जाने तक पूरे प्रदेश में आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

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