बढ़ गए एथनॉल के दाम, गन्ना बकाया भुगतान में मदद का दावा

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केंद्र सरकार ने एथनॉल की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार का दावा है कि बढ़ी कीमतों की मदद से चीनी मिले गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कर सकेंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने एथनॉल मिश्रि‍त पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के तहत गन्ना आधारित प्राकृतिक सामग्री से उत्पन्न‍ होने वाले एथनॉल की उच्च कीमतों को तय करने के अलावा विभिन्न निर्णय लिए हैं। ये बढ़ी हुई कीमतें 1 दिसम्बर, 2020 से 30 नवम्बर, 2021 की एथनॉल आपूर्ति वर्ष के चीनी सीजन 2020-21 के लिए है।

सरकार ने सी श्रेणी के भारी शीरे से बनने वाले एथनॉल की कीमतें 43.75 रुपये से बढ़ाकर 45.69 रुपये प्रति लीटर, बी श्रेणी के भारी शीरे से बनने वाले एथनॉल की कीमतें 54.27 रुपये से बढ़ाकर 57.61 रुपये प्रति लीटर, तो वहीं  गन्ने के रस/चीनी/चाशनी से बनने वाले एथनॉल की कीमतें 59.48 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 62.65 रुपये प्रति लीटर कर दी हैं।

इतना ही नहीं सरकार ने इसके अतिरिक्त जीएसटी एवं माल ढुलाई प्रभार भी अतिरिक्त रूप से देने का भी फैसला लिया है। तेल विपणन कंपनियों को वास्तविक आधार पर माल ढुलाई प्रभार तय करने की सलाह दी गई है ताकि एथनॉल को लंबी दूरी तक ले जाने पर अतिरिक्त अनावश्यक खर्च से बचा जा सके।

सरकार का कहना है कि इस योजना का फायदा सभी डिस्टिलरियों को मिलेगा और ईबीपी कार्यक्रम के तहत उनसे एथनॉल की आपूर्ति की उम्मीद है। एथनॉल आपूर्तिकर्ताओं को दिए जाने वाले भुगतान से गन्ना किसानों की बकाया राशि में कमी आने में मदद मिलेगी और जिसका सीधा फायदा गन्ना किसानों को ही मिलेगा।

सरकार ईबीपी कार्यक्रम का क्रियान्वयन कर रही है जहां तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक एथनॉल मिलाकर बेचती हैं। इस कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2019 से अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के अलावा पूरे भारत में विस्तारित किया गया है और इसका उद्देश्य वैकल्पिक और पर्यावरण ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

सरकार ने 2014 से ही एथनॉल की प्रशासित कीमतों की अधिसूचना जारी की है और 2018 में पहली बार विभिन्न प्रकार की कच्ची सामग्री पर आधारित एथनॉल की कीमतों की सरकार ने घोषणा की थी। यहां सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया  कि गन्ना उत्पादन में लगातार हो रही बढ़ोतरी से चीनी की कीमतों पर असर पड़ा है और चीनी उद्योगों की ओर से गन्ना उत्पादक किसानों को समय पर भुगतान नहीं किए जाने से किसानों की बकाया राशि में बढ़ोतरी हुई है। एथनॉल की कीमतें बढ़ने से चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी हो सकेगी जिससे मिलें गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कर सकेंगी।

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