उत्तर प्रदेश: चक्का जाम करने वाले किसानों पर दर्ज हुए मामले, किसानों ने कहा आंदोलन दबाने की कोशिश लेकिन रुकेंगे नहीं

किसानों ने उठाया सरकार की मंशा पर सवाल कहा, जब शांति से किया गया प्रदर्शन तो किसानों पर क्यों दर्ज हुए मुकदमें.

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पांच नवंबर को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने देशव्यापी चक्का जाम किया। देश के लगभग सभी बड़े किसान संगठनों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश में भी किसान संगठनों के कार्यकर्ता और किसानों ने जगह-जगह जाम लगाकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया। लेकिन बिजनौर में किसानों का यह प्रदर्शन प्रशासन को रास नहीं आया। जिले में अलग-अलग जगहों पर 87 किसानों पर नामजद और 575 अज्ञात लोगों पर मामले दर्ज हुए हैं।

बिजनौर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की ओर से चक्का जाम करने पर सैकड़ों लोगों पर सात थानों में मुकदमा दर्ज किया गया है। संगठन की तरफ से कृषि कानूनों के विरोध और अन्य मांगों को लेकर आठ जगहों पर चक्का जाम किया गया था। पुलिस की इस कार्रवाई में जिन किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उनमें से कुछ किसानों ने हिंद किसान से बातचीत में कहा कि सरकार और प्रशासन आंदोलन को दबाने और किसानों को डराने की कोशिश कर रहा है।

बिजनौर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिला महासचिव वेद प्रकाश ने हिंद किसान से फोन पर बातचीत में कहा, ‘हमने पहले ही प्रशासन को प्रदर्शन के बारे में बता दिया था। हमने चक्का जाम के दौरान पूरी तरह से शांति बनाए रखी। इससे पहले भी कई बार प्रदर्शन किए लेकिन पहले ऐसी कार्रवाई कभी नहीं हुई। प्रशासन हमारे संगठन पर दवाब बनाना चाह रहा है। हमारी लड़ाई जारी रहेगी, हम मुकदमें वापस करने की मांग कर रहे हैं। हम दिल्ली होने वाले प्रदर्शन में इस मुद्दे को भी उठाएंगे।’

वहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के महासचिव कैलाश सिंह लांबा के खिलाफ भी पुलिस ने नामजद मामला दर्ज किया है। हिंद किसान के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हमारे संगठन की तरफ से देशव्यापी चक्का जाम का ऐलान था। प्रशासन को पूरी जानकारी थी, हमने जिले में 8 जगहों पर चक्का जाम किया था। हमने पहले ही तय किया था कि चक्का जाम में ऐंबुलेंस, शवयात्रा, महिलाओं, बीमारों, छात्रों और आपातकालीन स्थिति में जा रहे लोगों को किसी भी तरह से नहीं रोका जाएगा। दोपहर करीब 1 बजे से साढ़े 3 बजे तक चले चक्का जाम में किसी भी तरह से शांति भंग नहीं हुई तो फिर ये मुकदमें क्यों दर्ज किए गए।’

कैलाश सिंह आगे कहते हैं कि ‘हमें शाम को खबर मिली की 87 लोगों पर नामजद और 575 अज्ञात लोगों को खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने हमें बाद में बताया कि यहां धारा 144 लागू की गई थी। जबकि उसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन यानी एबीवीपी और युवा हिंदु वाहिनी ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया, पुतले फूंके लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। केवल किसानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इससे सरकार और प्रशासन की मंशा का साफ पता चलता है। हम जिला स्तर पर आंदोलन करेंगे, जेलभरो आंदोलन करेंगे। दिल्ली में 26-27 नवंबर को होने वाले प्रदर्शन में जाएंगे और आवाज बुलंद करेंगे।’

उन्होंने कहा कि ‘इतिहास गवाह है कि जब भी किसी सरकार ने किसानों को दबाने की कोशिश की है, किसानों ने उस सरकार को हमेशा सबक सिखाया है। न हम पहले डरे थे न अब डरेंगे, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।’

बिजनौर जिले के कीतरपुर के ब्लॉक अध्यक्ष उपेंद्र राठी ने भी इसी तरह की बात कही। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ उनके संगठन को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। हिंद किसान से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘जाम तो हमने पहले भी लगाए हैं, प्रदर्शन भी किए न पहले कभी कोई हिंसा हुई और न इस बार। इसके बावजूद सरकार किसानों की अवाज को दबाना चाहती है। हम प्रशासन के साथ बातचीत करेंगे अगर किसानों पर दर्ज मामले वापस नहीं हुए तो आंदोलन और तेज होगा।’

इस मामले पर कुछ पुलिस थानों में हमने बातचीत करने की कोशिश की तो वहां से मीडिया में बयान जारी करने की बात कही गई। बिजनौर के नहटौर थाने में 14 लोगों और 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। नहटौर थाने के प्रभारी निरीक्षक एसपी सिंह ने स्थानीय मीडिया को बताया कि दारोगा राजेंद्र प्रजापति की तहरीर पर किसान संगठन के कार्यकर्ताओं की ओर से शांति भंग करने व जाम लगाने पर ये मुकदमा दर्ज किये गये हैं।

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