कृषि कानूनों के खिलाफ 25 सितंबर को भारत बंद 

देश भर के लगभग सभी किसान संगठनों ने 25 सितंबर को एक साथ भारत बंद का ऐलान किया है। इसके साथ ही किसान संगठनों ने आगे और तीखे आंदोलनों की भी चेतावनी दी है।

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कृषि से जुड़े तीनों विधेयक भले ही संसद से पारित हो गए हों लेकिन किसानों ने इनके खिलाफ आंदोलनों को और तेज करने का ऐलान कर दिया है। किसान जहां 5 जून 2020 को कृषि से जुड़े तीनों अध्यादेश आने के बाद से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं तो वहीं संसद में भी लगातार हंगामा जारी है। किसानों की मांग है कि सरकार इन तीनों विधेयकों को वापस ले या फिर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की गारंटी देने वाला कानून लाए।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति यानी एआईकेएससीसी ने 25 सितंबर को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसे ‘भारत बंद’ का नाम दिया गया है। एआईकेएससीसी देश के 200 से ज्यादा किसान संगठनों का साझा मंच है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह का कहना है कि, ‘हमारी मांग तीनों विधेयकों को वापस लेने या MSP की गारंटी देने वाला कानून बनाने की है। 25 सितंबर को केंद्र सरकार के विधेयकों के खिलाफ देश भर के लगभग सभी किसान संगठन भारत बंद में शामिल होंगे। बीते कई दिनों से किसान प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसका सरकार पर साफ दबाव दिख रहा है। सरकार लगातार सफाई दे रही है और अब विज्ञापनों के जरिये लोगों को समझाने की भी कोशिश की जा रही है। लेकिन देश के किसान इन कानूनों से होने वाले नुकसान को अब समझ गए हैं’।

हरियाणा के सिरसा में तीनों विधेयकों के खिलाफ अखिल भारतीय स्वामीनाथन आयोग संघर्ष समिति के नेतृत्व में बीते 17 दिनों से प्रदर्शन जारी है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार का कहना है कि, ’25 सितंबर के भारत बंद को सफल बनाने के लिए किसान और संगठन से जुड़े कार्यकर्ता व्यापारियों से बाजार बंद रखने की अपील कर रहे हैं और व्यापारी वर्ग भी किसानों के साथ है। इसके साथ ही हमने 26 सितंबर को सिरसा में महापंचायत बुलाई है, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे’।

विकल पचार ने कहा कि उन्होंने सरकार को 29 सितंबर तक कोई ठोस फैसला लेने का वक्त दिया है। इसके बाद आंदोलन को अलग रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि, ’29 सितंबर तक सरकार ने अगर कि मांगें नहीं मानी तो 30 सितंबर से सिरसा जिले की सभी 145 पानी की टंकियों पर किसान अपने परिवार के साथ चढ़ जाएंगे और हमारे जान-माल की जिम्मेदारी सरकार की होगी’।

भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद मलिक का कहना है कि, ‘25 सितंबर को भारतीय किसान आंदोलन की समन्वय समिति की तरफ से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल जैसे राज्यों में सुबह 10 बजे से बेमियादी किसान कर्फ्यू और चक्का जाम किया जाएगा। हमारी मांग एमएसपी और खरीद की गारंटी देने की है जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मान लेती आंदोलन जारी रहेंगे’।

राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ का कहना है, ‘हम पहले दिन से कह रहे हैं कि ये कानून किसानों के लिए मौत का फरमान हैं। ये किसानों के अस्तित्व की लड़ाई है और इसके लिए किसान आखिरी सांस तक लड़ेंगे। जब तक एमएसपी की गारंटी नहीं मिल जाती है तब तक किसान आंदोलन जारी रहेंगे। इसके साथ ही हम अक्टूबर के अंत तक राजधानी दिल्ली में एक बड़े आंदोलन की तैयारी कर भी रहे हैं’।

बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह टुड्डू का कहना है कि, ’25 सितंबर को पूरे बिहार में किसान अपने-अपने इलाकों में बंद और विरोध प्रदर्शन करेंगे। सरकार नहीं मानी तो आंदोलन जारी रहेंगे और लगातार तेज होते रहेंगे’।

वहीं 25 सितंबर को बीकेयू एकता सिद्धुपुर ने भी पंजाब बंद का ऐलान किया है। सरदार वीएम सिंह का कहना है कि 25 सितंबर के प्रदर्शन में शामिल होने वाले किसान संगठनों के साथ 27 सितंबर को दिल्ली में चर्चा के बाद आगे की रणनीति और आंदोलनों की रूपरेखा तय की जाएगी।

राष्ट्रपति की अनुमति मिलने के बाद 5 जून 2020 को ही केंद्र सरकार के कृषि संबंधी तीन अध्यादेश लागू हो गए थे, जो अब विधेयक बन कर संसद के दोनों सदनों से पारित हो गए हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की स्वीकृति के साथ ही ये विधेयक कानून बन जाएंगे. लेकिन लगातार तीखे हो रहे किसान आंदोलन सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। इसके साथ ही खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी कैबिनेट किसानों को ये समझाने की कोशिशों में लगी है कि इन कानूनों से किसानों के लिए एक नए युग की शुरुआत होने वाली है।

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