26-27 नवंबर से राजधानी कूच करेंगे किसान

आंदोलन की नई रणनीति के तहत बीजेपी सांसदों और विधायको का गांवों में बायकॉट से लेकर दिल्ली घेराव की रणनीति बनाई गई है।

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

25 सितंबर के भारत बंद के बाद अब अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने देशव्यापी प्रदर्शनों की नई तारीखों का एलान कर दिया है। इसमें जगह-जगह प्रदर्शन करने के अलावा गांवों में बीजेपी सांसद और विधायकों का बायकॉट करना भी शामिल है। इसके साथ ही दिल्ली का घेराव करने की भी रणनीति बनाई है।

एआईकेएससीसी के राष्ट्रीय संयोजक वीएम सिंह ने कहा, ’25 सितंबर को पहली बार किसानों ने देशव्यापी भारत बंद किया। 28 सितंबर को हमने अपील की थी कि युवा शहीद भगत सिंह की प्रतिमा के सामने ये संकल्प लें कि जब तक इन कानूनों को वापस करा कर ही दम लेंगे।’

आंदोलन की आगे की रणनीति की जानकारी देते हुए वीएम सिंह ने कहा, ‘2 अक्टूबर से पूरे देश के अंदर गांव-गांव में बीजेपी सांसदों और विधायकों के बायकॉट की शुरुआत की जाएगी। जब तक वे इन कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार पर दवाब नहीं बनाते, उन्हें गांवों में नहीं घुसने दिया जाएगा। 6 अक्टूबर को हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की घेराबंदी की जाएगी। 14 अक्टूबर को देश के हर तहसील, ब्लॉक, मंडियों में एमएसपी अधिकार दिवस मनाया जाएगा। इसके बाद 26-27 नवंबर से देश के किसान राजधानी कूच करेंगे और दिल्ली का घेराव करेंगे।’

अखिल भारतीय किसान सभा (एआईकेएस) के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि, ‘तानाशाही सरकार आंदोलन की आवाज को लगातार दबा रही है। बीते 6 महीनों से लगातार प्रदर्शन के बावजूद सरकार ने तीन कानून पास कर दिये। 70 सालों में किसी सरकार ने किसानों के साथ इतना विश्वासघात नहीं किया, जितना मौजूदा सरकार कर रही है। हम जमीन पर इन कानूनों को लागू नहीं होने देंगे।’

वहीं, स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव ने कहा कि, ‘ये तय है कि अब लड़ाई सड़क पर ही होगी। हम सिर्फ इतना जानना चाहते हैं कि इन कानूनों से किसानों को कैसे फायदा होगा, लेकिन सरकार अभी ये समझा नहीं पाई है।’

दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित एआईकेएससीसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह भी कहा गया कि सरकार चाहे तो अपने 6 मंत्रियों को किसान नेताओं के सामने बहस के लिए भेजे, जिसकी सीधी रिपोर्टिंग हो, अगर मंत्रियों ने हमें यह समझा दिया कि इन कानूनों से किसानों का भला होने वाला है तो हम अपनी गलती मान लेंगे और प्रदर्शन रोक देंगे। लेकिन अगर वे हमारी शंकाओं का समाधान नहीं कर पाए तो सरकार इन कानूनों को वापस ले।’

5 जून से कृषि संबंधी अध्यादेश पारित होने के बाद से ही देशभर में किसान आंदोलन हो रहे हैं। इसमें हर राज्य के किसान संगठन अपनी-अपनी रणनीति के तहत प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत बंद की अपील पर देशभर के लगभग सभी किसान संगठन एक साथ सड़कों पर उतरे थे। ऐसे में आने वाली इन तारीखों में एक बार फिर किसान संगठन सड़क पर उतर चुके हैं।

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