किसानों के समर्थन में आए कलाकार

कृषि विधेयकों को लेकर कुछ कलाकार किसानों के विरोध के साथ खड़े हैं तो कुछ कलाकार सरकार के दावों के साथ

महिला किसान दिवस पर उनके ‘मन की बात’

'महिला किसान दिवस' पर सुनिए ख़ास बातचीत, आदिवासी महिलाओं के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकार को लेकर उनके संघर्ष और तीनों विवादित कृषि क़ानून से क्या हैं महिला किसानों के लिए आगे की चुनौतियाँ, क्या हैं डर? हिंद किसान ने AIl India Union for forest working People (AIUFWP) और आदिवासी अधिकारों से जुड़ी ऐक्टिविस्ट- #RomaMalik और UN Secy General के Youth advisory group on Climate Change की भारत से सदस्य, उड़ीसा की #ArchnaSoreng से बातचीत की।

किसान आंदोलन में कितनी ऐक्टिव हैं महिलाएँ?

जब दिल्ली के बॉर्डर्ज़ पर किसान और जनता खेती के मुद्दों और तीन कृषि क़ानून की वापसी को लेकर डटे हुए हैं, हिंद किसान ने राजधानी दिल्ली के बॉर्डर से दूर, राजस्थान के झुनझुनू से एक महिला ऐक्टिविस्ट से बातचीत की। ये तमाम महिलाओं के साथ collectorate पर धरना दे रही हैं , उनसे जाना कि तीनों कृषि क़ानून पर बने गतिरोध पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है, आंदोलन को लेकर उनकी क्या तैयारी है? सुनिए उनकी मोदी जी से सीधी माँग- बात सीधी, मगर तीखी।

सरकार दिखा रही बड़प्पन, फिर फ़ैसले में देरी क्यूँ?

'सीधी मगर तीखी बात' में पूर्व कृषि मंत्री, सोमपाल शास्त्री जी की कृषि क़ानून पर सरकार की तरफ़ से मामले को सुलझाने के रवैये पर बेबाक़ राय। 15 जनवरी को किसानों और सरकार के बीच 9वे राउंड की वार्ता में कृषि क़ानून पर एक बार फिर कोई सहमति नहीं बन पायी, अगली तारीख़ 19 जनवरी की तय हुई है। किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को और तेज़ करने का संदेश दे दिया है।मामले में नए पेंच जुड़ रहे हैं, सुनिए ये ख़ास बातचीत।

वार्ता की मिली नयी तारीख़, कब बनेगी बात?

१५ जनवरी को कृषि क़ानून को लेकर सरकार और किसान की वार्ता एक बार फिर बेनतीजा रही, नयी तारीख़ १९ जनवरी तय हुई है, MSP के मुद्दे पर सरकार बचती रही जबकि उसी पर निर्णायक फ़ैसला लेने के मन से आए थे संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य, आख़िर कब तक टलता रहेगा MSP का मुद्दा और MSP के अलावा भी क्यूँ ज़रूरी हैं बाक़ी मुद्दे? क्या होगा आगे?

SC के आदेश से सुलझेगा या उलझेगा मामला?

SC ने १२ जनवरी को ३ कृषि क़ानून को अमल में लाने पर अगले ऑर्डर तक रोक लगा दी है, एक कमेटी का भी गठन कर दिया है ताकि ज़मीनी हालात का जायज़ा लिया जा सके, एक तरह से जो काम सरकार तमाम बैठकों के बावजूद नहीं कर पायी, कृषि क़ानून पर बने डेड्लाक को ख़त्म नहीं कर पायी उस पर एक कदम आगे बढ़ते हुए, SC ने ऑर्डर जारी कर दिया, क्या किसानों को स्वीकार है ये ऑर्डर? कौन है इस समिति के सदस्य, कितना सही है ये फ़ैसला? सुनिए महाराष्ट्र के Farm Activist - Vijay Jawandhia जी से ये ख़ास बातचीत।

कृषि से जुड़े तीनों विधेयकों पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा जारी है। इस मामले में ज्यादातर कलाकारों ने किसानों की राय का समर्थन किया है। लेकिन एक खेमा ऐसा भी है जो कृषि विधेयकों पर सरकार की राय का समर्थन कर रहा है। इस मामले में कलाकारों ने हरियाणा के पीपली में किसान रैली के दौरान लाठीचार्ज होने के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करनी शुरू कर दी थी। लेकिन अब खुलकर बोल रहे हैं। पंजाबी गायकों ने गानों के जरिए भी अपनी बात रखी है।

पंजाबी गायक कोराला मान ने किसानों की समस्याओं को लेकर नया गाना बनाया है. इसे नाम दिया है ‘वेपन शोल्डर’। यूट्यूब पर अब तक इस गाने को 32 लाख से ज्यादा बार सुना और देखा गया है।  

कृषि विधेयकों के पास होने के बाद पंजाबी गायक जस बाजवा ने भी इसको लेकर एक गाना बनाया है, जिसे काफी पसंद किया जा रहा है।

गायक दलजीत दोसांझ ने कृषि विधेयकों पर किसान विरोधी बताया है. ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि किसान विरोधी बिल का हम सब विरोध करते हैं। हालांकि, लोगों की आलोचना के बाद दलजीत ने यह भी ट्वीट किया कि वह किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में नहीं हैं, बल्कि किसानों के हक की मांग कर रहे हैं।

एक्टर और सिंगर गिप्पी ग्रेवाल ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ‘किसान मजदूर एकता जिंदाबाद’ और ‘किसान बचाओ देश बचाओ’ लिख कर पोस्ट किया। इसके साथ ही उन्होंने एक गाना भी पोस्ट किया।

लोक कलाकार और बीजेपी नेता सपना चौधरी ने भी किसानों को लेकर फेसबुक पर एक कविता शेयर की और सरकार से किसानों की सुनवाई करने की अपील की।

खेत में दिन निकलता हैखेत में ही अंधेरा होता हैचिंन्ता में कटती है रातें चैन से कहाँ सोता हैसब के पेट पालता हैफिर…

Posted by Sapna Choudhary on Saturday, 12 September 2020

टीवी कलाकार सरगुन मेहता ने भी इंस्टग्राम और फेसबुक पर किसानों की रैलियों की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा ’किसान बचाओ देश बचाओ। किसान विरोधी बिल का हम सब विरोध करते हैं’।

एक्टर गुरप्रीत गुग्गी ने इंस्टाग्राम पर किसानों के समर्थन में ‘किसानों को बचाओ’ पोस्ट किया। साथ ही उन्होंने एक पोस्टर भी शेयर किया, जिस पर लिखा है ‘मैं विरोध करता हूं खेती सुधार काले कानून का। रोष। किसान बचाओ, पंजाब बचाओ’।

अभिनेता करमजीत अनमोल ने एक दिन में किसानों से जुड़ी दो तीन पोस्ट की। एक पोस्ट में उन्होंने किसानों की रैली की तस्वीर शेयर की तो दूसरी पोस्ट में लिखा कि ’खेती अध्यादेश, लोकसभा में हुआ पास।’ इसी पोस्टर पर क्रॉस का बड़ा सा निशान बना था जिस पर लिखा है बायकॉट यानी बहिष्कार।

एक्ट्रेस सोनम बाजवा ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें वो किसानों के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। जिस पर उन्होंने लिखा कि यह वीडियो सिर्फ इसलिए नहीं बना रही कि मेरे दादाजी, मेरे चाचाजी, समेत बहुत सारे लोग किसान हैं, खेती करते हैं। मैं यह इसलिए बना रही हूं, क्योंकि मैंने फसल उगाने से लेकर मंडी ले जाकर बेचने तक किसानों का सफर देखा है। उन्होंने लोगों से किसानों के साथ खड़े होने की अपील की।

सरकार के फैसले के समर्थन में भी हैं कलाकार

एक तरफ जहां कलाकार किसानों का समर्थन कर रहे है वहीं कई कलाकार ऐसे भी हैं जो कृषि विधेयकों को लेकर सरकार के फैसले की सराहना भी कर रहे हैं। इसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रानौत का नाम सबसे ऊपर है. ट्विटर पर उन्होंने लिखा कि, ‘वो जो रात दिन किसानों की दुर्दशा का शोर मचाते थे वही आज देश हित में किसानों के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर बनाने के बिल का बहिष्कार, सरकार की लोक कल्याणकारी योजना को रोकना चाहते हैं इन दुखी लोगों के दुख कभी कम नहीं होंगे’।

अपने दूसरे ट्वीट में कंगना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए जो लिखा उस पर उनकी चौतरफा आलोचना हुई। खासकर किसानों की इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई है।

हालांकि, आलोचना और बढ़ते विरोध को देखते हुए कंगना ने ट्विटर पर ही सफाई दी। उन्होंने लिखा कि, ‘जैसे श्री कृष्ण की नारायणी सेना थी, वैसे ही पप्पु की भी अपनी एक चंपू सेना है जो कि सिर्फ अफवाहों के दम पर लड़ना जानती है…।’

कृषि विधेयकों का समर्थन करते हुए सिंगर दलेर मेहंदी ने ट्वीट किया कि वर्षों से गुलामी की जंजीरों में बंद किसानों को जब नरेंद्र मोदी जी ने खुशहाल बनाने का काम किया है तो विपक्षी दलों में हाहाकार मच गया है। हम सब किसान भाइयों को बधाई।

कृषि विधेयकों पर कलाकार किसान और सरकार की राय के साथ बंट गए हैं. इस बीच किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं. उनका साफ कहना है कि सरकार इन विधेयकों को या तो वापस ले या फिर फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाला कानून बनाए.

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