संसद के monsoon सत्र के साथ साथ किसान भी संसद के निकट अपनी ‘किसान संसद’ लगा रहे हैं, देश के अलग अलग राज्यों से किसान इसमें अपना विचार रखने, अपनी माँग के समर्थन में आ रहे हैं, ऐसे में किसानों पर राजनीति करने और उनके नक़ली किसान होने के आरोप भी लग रहे हैं, क्या है उनके मन की बात? क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात को पुरज़ोर तरीक़े से रखने को राजनीति कहेंगे? क्या MSP की गारंटी देना नामुमकिन है?
सुनिए ‘Hind Kisan’ की ये ख़ास बातचीत, किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष, चौधरी Pushpendra Singh के साथ, बनाइए कृषि से जुड़े मुद्दों पर अपनी समझ।