कोविड 19 की दूसरी लहर में अप्रवासी मज़दूरों का क्या हाल है?
वो कौन सी योजनाएँ है जिनके तहत उन्हें राहत सामग्री, राशन और आजीविका कमाने के मौक़े दिए जा रहे हैं?
आप जान कर हैरान हो जाएँगे कि पिछली दफ़ा क़रीब 8 करोड़ अप्रवासी मज़दूरों को कोरोना के थपेड़ों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने जिस ‘आत्मनिर्भर भारत’ package के तहत ग़ैर राशन कार्ड धारी मज़दूरों को राशन दिया था वो योजना इस साल नदारद है!
जब असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे असंख्य लोगों की आजीविका, काम धंधे, दिहाड़ी, सब लॉक डाउन और कोरोना की भेंट चढ़ गए हैं, ऐसे में क्या शहरों में फँसे या अपने इलाक़ों में पलायन कर चुके मज़दूरों की थाली में खाना या उचित पोषण मिल पा रहा है? क्यूँ आए दिन ये देखने या सुनने को मिल रहा है कि साहब ‘हम कोरोना से तो नहीं, हाँ, भूख से ज़रूर मर जाएँगे’।
क्या है ज़मीनी हालात?
इन सब पर सुनिए ‘हिंद किसान’ की ये ख़ास बातचीत – सामाजिक कार्यकर्ता, #RTI ऐक्टिविस्ट और #RoziRotiAdhikarAbhiyaan से जुड़ी #AnjaliBharadwaj से।