कृषि क़ानूनों पर बने गतिरोध पर सरकार के लिए क्या है आगे का रास्ता, कैसे break होगी ice? क्या किसान को बरगलाया जा रहा है या पहली बार वो अपनी समझ को इज़्ज़त दे रहे हैं कि बिना बात मनवाए जाएँगे नहीं! क्या किसान ग़लत हैं?
11 round ki बातचीत के बावजूद , आंदोलन जिस point पर पहुँच गया है अभी भी केंद्रीय कृषि मंत्री किसान union और विपक्ष से ये पूछ रहे हैं कि क़ानून में काला क्या है? क्या अभी तक हुई बातचीत ज़ीरो है, उनमें क्लैरिटी नहीं आ पायी है? कितना अनुचित लगता है ये सवाल?