हिंद किसान ने ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर डटे किसानों से की ‘मन की बात’, किसानों में अभी भी कितना धैर्य, कितना जोश बाक़ी है, लोकतांत्रिक व्यवस्था में 100 दिन से ज़्यादा चलने वाले इस आंदोलन को किसानों की जीत समझा जाए या ये शर्म की बात है कि प्रजातंत्र में सरकार प्रजा की फ़रियाद अनसुनी कर रही है! बातचीत का कोई ओर छोर नज़र नहीं आ रहा है, कब तक चलेगी सरकार की ये चुप्पी या अनदेखी का दौर और किसानों का विरोध जो अलग अलग राज्यों में तेज़ी से फैल रहा है।